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Homeअपना जौनपुरकंधे की टूटी हड्डी का उपचार कराने आये मरीज की मौत

कंधे की टूटी हड्डी का उपचार कराने आये मरीज की मौत

  • कम्पाउडंर पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप
  • अस्पताल गेट पर शव रखकर परिजनों का हंगामा

जौनपुर धारा, जौनपुर। सोमवार की सुबह नगर क्षेत्र के नईगंज में चल रहे प्राइवेट त्रिशूल हॉस्पिटल में एक मरीज को गलत इंजेक्शन लगाने से मौत पर परिजनों ने जमकर हंगामा खड़ा कर दिया व लाश को अस्पताल के गेट पर रखकर प्रदर्शन किया। घटना की जानकारी मिलते ही नगर मजिस्ट्रेट देवेन्द्र सिंह एवं सीओ सिटी कुलदीप कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और मृतक के परिजनों को अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई करने का आश्वासन देते हुए लाश को पोस्टमार्टम हेतु भेजकर धरना प्रदर्शन को समाप्त कराया।

जानकारी के अनुसार बरईपार से बक्शा थाना क्षेत्र में आई बारात में सुधाकर सिंह नामक व्यक्ति का पैर मैट पर फिसल गया जिससे गिरकर उनकी कन्धे की हड्डी खिसक गयी थी।परिजन एवं स्थानीय लोगों ने उन्हें उपचार के लिए रविवार की देर रात डॉ. विनय तिवारी के त्रिशूल हॉस्पिटल में भर्ती कराया। परिजनों की माने तो कन्धा खिसकने के बाद भी मरीज खुद अपने पैरों से चलकर अस्पताल आया। आरोप है कि रविवार की रात उपचार के समय हॉस्पिटल के किसी अनट्रेन्ड एवं अनक्वालीफाई कम्पाउन्डर के इंजेक्शन लगाने के आधे घन्टे के बाद सुधाकर सिंह ने दम तोड़ दिया। मरीज की मौत के बाद जब उसके परिवार के लोगों ने हंगामा शुरू किया तो चिकित्सक विनय तिवारी सहित अस्पताल के सभी कर्मचारीगण अस्पताल छोड़कर वहां से फरार हो गये। इस घटना से नाराज परिजनों ने सोमवार की सुबह मृतक की लाश को अस्पताल के गेट पर रखकर हंगामा करना शुरू कर दिया। अस्पताल के सामने मचे बवाल की खबर मिलते ही नगर मजिस्ट्रेट व सीओ सिटी मौके पर पहुंचे और मृतक के परिजनों से बातचीत कर उन्हे समझाते हुए न्याय का भरोसा दिलाया। जिसके बाद हंगामे को खत्म कराकर लाश को पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया गया। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद त्रिशूल हॉस्पिटल पर कार्रवाई हो सकेगी। दूसरी ओर नगर मजिस्ट्रेट ने सीएमओ को इस अस्पताल की जांच कराने का भी निर्देश दिया है। इससे पहले भी इस तरह की घटना नगर के कई अस्पतालों में हो चुकी है। घटना के बाद विभागीय अधिकारी कोरम पूर्ण करते हुए मौके पर कार्यवाही का आश्वासन देकर मामले को रफा दफा कर देंते है। लेकिन नगर में चल रहे  मानक विपरित संचालित हो रहें हॉस्पिटलों पर आज तक कोई अभियान नहीं चला। जिसके कारण इस तरह के अस्पताल धड़ल्ले से संचालित हो रहें हैं।

बिना मानक पूरा किए चल रहे कई अस्पताल

  • कड़ाई से जांच हो जाए तो फंस सकते हैं कई अस्पताल संचालक

जौनपुर। प्राइवेट अस्पताल में लापरवाही की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी जनपद के कई अस्पतालों में अस्पताल कर्मियों की लापरवाही से कई लोगों की जान जा चुकी है। जनपद में बिना मानक को पूरा किए कई अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं। जब कोई ऐसी घटना सुनाई देती है तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी छापेमारी और कार्यवाही की बात करते हैं लेकिन कुछ दिन बाद सब ठंडा पड़ जाता है। प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए चकाचौंध तो खूब दिखाई देती है। शहर में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए जाते हैं।जब कोई नया अस्पताल खुलता है तो बैनर और पोस्टर से पूरा शहर पट जाता है। डॉक्टरों की डिग्रियां और अस्पताल में दी जाने वाली सुविधाएं बड़े बड़े अक्षरों में लिखी जाती है। अस्पताल में जो मानक पूरा नहीं रहता है। उसको भी स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों से मिलकर उनसे सांठगांठ करके उसे पूरा करा लिया जाता है। स्टाफ के नाम पर अपने सगे संबंधियों की भर्ती कर ली जाती है। जिनके पास ना स्वास्थ्य विभाग का कोई सर्टिफिकेट रहता है ना ही कोई प्रशिक्षण लिए रहते हैं। डॉक्टर के ना रहने पर यही लोग मरीजों की देखरेख करते हैं कि इसी बहाने हाथ भी साफ होता रहेगा। कहीं अगर जरा सी भी चूक हुई तो मरीज की जान पर बन आती है। मामला अगर खराब हो गया तो मरीज के परिजनों से लेनदेन करके मामला सलटाने की भी कोशिश की जाती है। हो–हल्ला मचने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक-दो दिन अस्पतालों में छापेमारी, जांच और सीज करने की कार्रवाई दिखाई जाती है। अस्पताल संचालक अनट्रेंड लोगों को कुछ दिनों के लिए हटा देते हैं। लेकिन मामला शांत होते ही उन्हें फिर वापस रख लिया जाता है। कुछ अस्पताल संचालक सफेदपोशों से फोन करवा कर अपना बचाव करवा लेते हैं तो कुछ लेनदेन से मामला निपटा देते हैं। सब कुछ जानते हुए भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौन धारण किए हुए बैठे रहते हैं और अस्पतालों में मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होता रहता है।