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Homeअपना जौनपुरअलविदा जुमा : इबादत के लिए झुके लाखों सर

अलविदा जुमा : इबादत के लिए झुके लाखों सर

  • अलग अलग मस्जिदों में अदा की गई अलविदा जुमा की नमाज

जौनपुर धारा, जौनपुर। शहर में अलविदा जुमा की नमाज पूरे अकीदत के साथ अदा की गई। नमाज के बाद मुल्क में अमन-चैन के लिए दुआ की गई। अलविदा जुमा की नमाज के लिए सुबह से ही तैयारियां शुरू हो गई थी। बच्चे, युवा, बुजुर्ग सभी ने मस्जिदों में जाकर नमाज अदा की। अलविदा जुमा की नमाज के लिए जिला प्रशासन ने एक दिन पहले ही सारी तैयारियां पूरी कर ली थी। डीएम, एसपी ने खुद मस्जिदों का निरीक्षण करके नमाज के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए थे। नमाजियों को किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत न हो इसके लिए मस्जिदों के बाहर पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। नगर में अटाला मस्जिद, बड़ी मस्जिद, शेर मस्जिद, शिया जामा मस्जिद सहित सब्जी मंडी, नवाब यूसुफ रोड, चहारसू चौराहा, ओलंदगंज, जोगियापुर, पालीटेक्निक चौराहा आदि स्थानों पर स्थित मस्जिदों में अलविदा जुमा की नमाज अदा की गई। शिया जामा मस्जिद नवाब बाग में अलविदा जुमा पर उपस्थित हजारों नमाजियों को खुत्बा ए जुमा में सम्बोधित करते हुए इमामे जुमा मौलाना महफुजुल हसन खां ने कहा कि रमजानुल मुबारक के रोजो से मुसलमान सब्र, आपसी मेलजोल, की तालिम हासिल करता है। मुस्लिम समाज की तरक़्की उसी वक्त मुमकिन है जब समाज शिक्षित हो। खुत्बा ए जुमा के बाद मौलाना ने हजारों नमाजियों को नमाजे जुमा अदा कराई और मख़्सूस दुआ पढ़ाई। मुल्क और मिल्लत की खुशहाली और अमन की मख़्सूस दुआ की। मुतवल्ली शिया जामा मस्जिद शेख अली मंजर डेजी और जामा मस्जिद नवाब बाग इन्तेजामिया कमेटी के सदस्यों ने सुव्यवस्थित नमाज की अदायगी के लिए नमाजियों और जिÞला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर पालिका परिषद प्रशासन एवं राजनेताओं शुक्रिया अदा किया। इस्लाम में जुमे के दिन को बाकी दिनों से ज्यादा अहमियत दी गई है। ऐसे में रमजान के दिनों में जुमा और भी खास हो जाता है। ईद से पहले रमजान के दौरान जमात-उल-विदा यानी आखिरी जुमे की नमाज का महत्व बड़ा माना गया है। इस्लाम धर्म में जुमा यानी शुक्रवार का दिन खास माना गया है। ऐसे में जब जुमा का दिन रमजान के महीने में आता है, तो उसकी अहमियत और भी बढ़ जाती है। खासतौर पर आखिरी जुमा खास माना जाता है। हदीस के मुताबिक, रमजान में इबादत और नेकी के बदले 70 गुना ज्यादा सवाब (पुण्य) मिलता है। रमजान में 30 दिनों तक रोजे रखे जाते हैं, यानी करीब 4 हफ्ते लोग उपवास रखते हैं, इन चार हफ्तों में जुमा तीन-चार बार आता है, लेकिन आखिरी जुमा ही खास माना जाता है। इस साल अलविदा जुमा 21 अप्रैल को मनाया गया। अलविदा जुमा के दिन भी सभी का रोजा होता है। साथ ही यह दिन खास भी होता है इसलिए अल्लाह की इबादत में नमाज पढ़ते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा सवाब मिल सके। अल्लाह का लाख-लाख शुक्रिया अदा करते हैं और गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए दुआ मांगते हैं।

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