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सत्संग से मन, चित्त, बुद्धि और अंत:करण की मैल की सफाई होती है : पंकज महाराज

खुटहन। 122 दिवसीय शाकाहार-सदाचार एवं मद्यनिषेध की अपील करने का संकल्प लेकर निकली जनजागरण यात्रा राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज महाराज के निर्देशन में 111वें दिन पड़ाव पर ग्राम तिघरा में कहा कि प्रेमी भाई-बहनों! यह सत्संग है। ‘सत्संग जल जो कोई पावे, मैलाई सब कटि-कटि जावे।Ó सत्संग से मन, चित्त, बुद्धि और अंत:करण की मैल की सफाई होती है। यजुर्वेद, ऋगवेद, सामवेद व अथर्ववेद भी सत्संग में समाहित है। सत्संग में ही जीव जागरण का बोध होता है। सत्संग से ही आत्म कल्याण की प्रेरणा जागती है। सत्संग से ही समाज में यशकीर्ति की प्राप्ति होती है। रामायण राम चरित मानस में भी यह प्रमाण मिलता है कि ‘मति कीरत, गति भूत भलाई, जो जेहि जतन जहां लगि पाई। सोई जानेउ सत्संग प्रभाऊ, लोकहुं वेद न आन उपाऊ।।Ó इसलिये आप लोग सत्संग के एक-एक वचन को ध्यान से सुनो। आपका यह षरीर पांच तत्व का पुतला है। स्वांसों की पूंजी समाप्त होते ही यह पिंजरा खाली करा लिया जायेगा। महाराज ने नशा त्याग करने तथा शाकाहार अपनाने की अपील करते हुये कहा कि पशुओं के बेमेल खून को जब आप अपने खून में मिला लेंगे तो तरह-तरह की बीमारियां होने लगेंगी।

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