खुटहन। कमालपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक संतोष जी महराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण और गोपियों के बीच आलौकिक निस्वार्थ प्रेम था। वासना रहित पूर्ण समर्पण के प्रेम का प्रतीक है गोपियां और कृष्ण का प्रेम। उन्होंने भगवान कृष्ण को गोकुल से विदा होकर मथुरा जाने का बृतांत बड़े ही भावपूर्ण प्रस्तुत किया। जिसे सुनकर श्रोताओं की आंखें नम हो गई। महाराज ने कहा कि अक्रूर जब कृष्ण और बलराम को रथ पर बैठाने लगे तो गोकुल के नर नारी,पशु पक्षी सब उदास हो गये। मानो प्रकृति की सारी हरियाली रेगिस्तान बन गई हो। नंद बाबा और माता यशोदा से विदा लेकर रथ आगे बढ़ा तो गोपिकाएं मार्ग पर लेटकर रास्ता बंद कर दिया। कहा कि हम कृष्ण के बिना जीवित नहीं रह पायेंगे। जिंदा लाश बनकर जीने से अच्छा है कि हम सभी रथ के पहिए के नीचे आकर अपने प्राण ही दे दें। भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों से फिर वापस आने का वादा किया तब उन्होंने रास्ता छोड़ा। गोपियों पेड़ों अट्टालिकाओं पहाड़ों पर चढ़ कृष्ण के जाते हुए रथ को निहारती रह गई। इस मौके पर सागर दूबे, प्रमोद चतुर्वेदी,मुकुंदधर तिवारी, रमेश तिवारी, मायाशंकर तिवारी, विष्णु तिवारी, विरेन्द्र यादव,अजय यादव, श्रीपाल पाण्डेय,राम आनंद पांडेय आदि मौजूद रहे। आयोजक प्रधानाचार्य प्रमोद व संतोष तिवारी ने आगतो का स्वागत व आभार प्रकट किया।
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श्रीकृष्ण और गोपियों के अलौकिक प्रेम का बृतांत सुन श्रोता हुए गदगद

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