भारतीय क्रिकेट टीम के सेटअप में कहीं न कहीं खामी जरूर है. क्योंकि एक के बाद एक खिलाड़ी चोटिल हो रहा है. ये सभी चोटें बांग्लादेश दौरे पर खिलाड़ियों को आई हैं जो शर्मनाक है. भारतीय खिलाड़ियों ने मैदान पर रन बनाने और विकेट लेने के अपेक्षा ज्यादा समय फीजियो रूप में रिहैब करते हुए बिताया है. भारतीय टीम के एक पूर्व ट्रेनर ने चोटिल खिलाड़ियों की बढ़ती संख्या के लिए मौजूदा सेट की जमकर आलोचना की है. हालांकि ऐसी उम्मीद की जा रही है कि बीसीसीआई खराब परफॉर्मेंस की वजह से कुछ सहयोगी स्टाफ सदस्यों को बाहर करने की तैयारी में है. टीम इंडिया के एक पूर्व ट्रेनर जो 2011 में विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे उन्होंने एक दैनिक समाचार से बात करते हुए कहा, सपोर्ट स्टाफ के सदस्यों की संख्या देखते हुए वर्तमान स्थिति चिंताजनक है. उन्होंने नाम बताने की शर्त पर कहा, सिस्टम को प्रभावी बनाने के लिए सही लोगों का होना जरूरी है. जहां तक स्ट्रेंथ-कंडीशनिंग और शारीरिक फिटनेस की बात है तो इसमें व्यावसायिकता की कमी है. इधर-उधर उंगलियां उठाने के बजाय किसी को जिम्मेदारी लेनी होगी. उन्होंने आगे कहा, ऑन-फील्ड चोटें बेकाबू होती हैं. लेकिन खिलाड़ियों की फिटनेस से जुड़ी चोटें एक गंभीर चिंता का विषय हैं. यह टीम इंडिया के लिए एक बड़ी समस्या है. ऐसा कहा जा रहा है बीसीसीआई सहयोगी स्टाफ के सदस्यों के भविष्य को लेकर कठोर कदम उठा सकता है. मेंटल कंडीशनिंग कोच पैडी अप्टन, टीके दिलीप, फील्डिंग कोच सोहम देसाई और भारतीय टीम के स्ट्रेंथ कंडीशनिंग कोच नितिन पटेल के खिलाफ बोर्ड ने कड़े फैसले लेने की तैयारी कर ली है. बांग्लादेश दौरे पर गए टीम इंडिया के 18 सदस्यों को देखा जाए तो उनमें से सिर्फ 13 खिलाड़ी ही फिट हैं. मोहम्मद शमी सीरीज से पहले बाहर हो गए. रोहित शर्मा चोटिल हुए. दीपक चाहर को हैमस्ट्रिंग इंजरी हूई. यहां तक कप्तान रोहित शर्मा भी चोटों को लेकर अपनी निराशा जाहिर कर चुके हैं.
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E-Paper 10-06-2026
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भारतीय क्रिकेटरों की बढ़ती चोटों पर बरसे पूर्व ट्रेनर

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