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बहुत कम उम्र में धर्म, सच्चाई और मानवता के लिए गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों ने कर दिए थे प्राण न्योछावर : गिरीश यादव

जौनपुर। वीर बाल दिवस के उपलक्ष्य में भाजपा शाहीपुर स्थित कार्यालय पर वीर बाल दिवस पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्ष अजीत प्रजापति ने की एवं कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री पीयूष गुप्ता ने की। सर्वप्रथम पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुष्प चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रजवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके पहले नगर में वीर बाल दिवस पर एक प्रभात फेरी निकाली गई जो कोतवाली से चलकर सदभावना पुल से होते हुए ओलंदगंज स्थित गुरुद्वारा पर समाप्त हुई जिसमें खेल और युवा कल्याण मंत्री गिरीश चन्द्र यादव एवं जिलाध्यक्ष अजीत प्रजापति शामिल हुए। मंत्री गिरीश चन्द्र यादव ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है यह दिन सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों-जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के अद्वितीय बलिदान को याद करने के लिए समर्पित है गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों ने बहुत कम उम्र में धर्म, सच्चाई और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे उनका साहस आज भी देश को प्रेरणा देता है। मुगल सेना गुरु गोबिंद सिंह को पकड़ना चाहती थी इस कारण गुरु को अपने परिवार से अलग होना पड़ा उनके दो बड़े पुत्र, साहिबजादा अजित सिंह और साहिबजादा जुझार सिंह, मुगल सेना से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए उस समय उनकी उम्र बहुत कम थी, लेकिन उनका साहस अद्भुत था। गुरु गोबिंद सिंह की माता, माता गुजरी अपने दो छोटे पोतों, साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह के साथ छिपकर रह रही थीं। दुर्भाग्य से वे मुगलों के हाथों पकड़ लिए गए। मुगल शासकों ने दोनों छोटे साहिबजादों पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला, लेकिन उन्होंने सिख धर्म छोड़ने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया। यह घटना भारतीय इतिहास की सबसे हृदयविदारक घटनाओं में से एक है। जिला प्रभारी अशोक चौरसिया ने कहा कि भारत सरकार ने वर्ष 2022 में यह घोषणा की कि हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य देश के बच्चों और युवाओं को साहिबजादों के बलिदान से परिचित कराना है। जिलाध्यक्ष अजीत प्रजापति ने कहा कि वीर बल दिवस, जो हर साल 26 दिसंबर को मनाया जाता है, भारत में एक राष्ट्रीय स्मृति दिवस है जो दसवें सिख गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी के छोटे बेटों की असाधारण वीरता और शहादत को याद करता है। उन्होंने आगे कहा कि वीर बल दिवस का उत्सव 26दिसंबर 1705 से मनाया जाता है, जब वज़ीर खान के नेतृत्व वाली मुगल सेना ने दो युवा साहिबजादों को बंदी बना लिया था केवल नौ और छह वर्ष की आयु के इन दोनों बच्चों पर अपने धर्म को त्यागकर इस्लाम धर्म अपनाने का अत्यधिक दबाव डाला गया परन्तु, दोनों बच्चों ने अपने विश्वास पर अडिग रहने का निश्चय किया उनके इस अडिग रुख के कारण ही उनकी क्रूरतापूर्वक हत्या कर दी गई। पूर्व जिला अध्यक्ष सुशील उपाध्याय ने कहा कि इस दिवस को मनाने का निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जनवरी, 2022 को लिया था, जो भारत के इतिहास में बच्चों के योगदान को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था पहला आधिकारिक आयोजन 26 दिसंबर, 2023 को हुआ, जिसमें युवा पीढ़ी को लचीलेपन और नैतिक अखंडता के बारे में सिखाने के महत्व पर जोर दिया गया। वीर बल दिवस 2025 का विषय पराक्रम और नई सोच का निर्माण करना है यह दिन न केवल साहिबजादों की स्मृति का दिन है, बल्कि भारतीय युवाओं को साहस, ईमानदारी और निस्वार्थता जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने का एक मंच भी है। उक्त अवसर पर जिला उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंघानिया, पूर्व विधायक सुरेंद्र प्रताप सिंह, श्याम मोहन अग्रवाल, आशीष गुप्ता, पुर्व नगर अध्यक्ष अमित श्रीवास्तव, विकास शर्मा, डा.रामसूरत मौर्य, इंद्रसेन सिंह, घनश्याम यादव, दक्षिणी अध्यक्ष डॉ.कमलेश निषाद, सुनील सेठ, अनिल गुप्ता, नंदलाल यादव, विपिन सिंह, विष्णु प्रताप सिंह, सतीश सिंह त्यागी, ओ.पी.सिंह, राजेश कनौजिया, अभिषेक श्रीवास्तव, दीपक मिश्रा सहित आदि उपस्थित रहें।