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Homeअपना जौनपुरदिव्यांग विद्यालय मे मनाई गई गाँधी जयंती

दिव्यांग विद्यालय मे मनाई गई गाँधी जयंती

जौनपुर धारा, बदलापुर। श्री समरथ्थी राजाराम दिव्यांग एवं बालिका शिक्षण संस्थान कुशहा घनश्यामपुर में सोमवार को गांधी जयंती मनाई गई। जिसमे विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि महात्मा गांधी भारत एवं भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी। जिसने भारत को भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम दिलाकर पूरे विश्व में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया। अमर सिंह ने बताया कि उन्हें संसार में साधारण जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। संस्कृत भाषा में महात्मा अथवा महान आत्मा एक सम्मान सूचक शब्द है। गांधी को महात्मा के नाम से सबसे पहले 1915 में राजवैद्य जीवराम कालिदास ने संबोधित किया था। एक अन्य मत के अनुसार स्वामी श्रद्धानन्द ने 1915 में महात्मा की उपाधि दी थी, तीसरा मत ये है कि गुरु रविन्द्रनाथ टैगोर ने महात्मा की उपाधि प्रदान की थी। 12 अप्रैल 1919 को अपने एक लेख में उन्हें बापू (गुजराती भाषा में बापू अर्थात् पिता) के नाम से भी स्मरण किया जाता है। एक मत के अनुसार गांधीजी को बापू सम्बोधित करने वाले प्रथम व्यक्ति उनके साबरमती आश्रम के शिष्य थे। सुभाष चन्द्र बोस ने 6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो से महात्मा गांधी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित करते हुए आज़ाद हिन्द फौज के सैनिकों के लिये उनका आशीर्वाद व शुभकामनाएँ माँगीं थीं। प्रति वर्ष 2 अक्टूबर को उनका जन्म दिन भारत में गांधी जयन्ती के रूप में और पूरे विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर विरेंद्र यादव, सुधांशु, हीरालाल विश्वकर्मा विष्णुकांत तिवारी, अंकित रजक, राजबहादुर नाविक, ज्योति सिंह, रीना यादव, रीना गौतम, मोनिका वर्मा आदि लोग उपस्थित रहे।