वाराणसी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, वाराणसी एवं संस्कार भारती काशी महानगर के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को नरिया स्थित सभागार में ‘नाद यात्रा’ सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा।
राग पुरिया धनश्री में गायन से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ युवा गायिका विदुषी वर्मा के गायन से हुआ। उन्होंने राग पुरिया धनश्री में विलंबित एकताल की बंदिश ‘है मैया पुकारे’ प्रस्तुत की। इसके बाद उन्होंने छोटा ख्याल और दादरा की प्रस्तुति दी, जिसे श्रोताओं ने सराहा। गायन में तबले पर श्रीकांत मिश्रा और हारमोनियम पर ओमप्रकाश पांडेय ने संगत की।
वायलिन की तानों पर गूंजा सभागार
गायन के बाद वायलिन वादक पंडित सुखदेव मिश्र ने अपनी प्रस्तुति दी। उनकी वायलिन की तानों ने सभागार का माहौल संगीतमय कर दिया। प्रस्तुति के दौरान श्रोताओं ने तालियों के साथ कलाकार का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बीएचयू के संगीत कला संकाय के पूर्व संकाय प्रमुख प्रो. के. शशि कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संचालन सुषमा गुप्ता ने किया। अंत में डॉ. रामवीर शर्मा ने अतिथियों, कलाकारों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।


