जौनपुर। महिला जन आक्रोश कार्यक्रम के तहत आयोजित धरना-प्रदर्शन में महिलाओं ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के समर्थन में जोरदार आवाज उठाई। कार्यक्रम में महिला पदाधिकारियों ने महिलाओं के अधिकार, समान भागीदारी और राजनीतिक सशक्तिकरण को लेकर अपने विचार व्यक्त किए।
महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा
जिला मंत्री अंशु कुशवाहा ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं ने हमेशा देश को दिशा देने का काम किया है, लेकिन अधिकार देने की बात आने पर देरी की जाती है। उन्होंने कहा कि संसद में महिलाओं की भागीदारी उनका अधिकार है, कोई दान नहीं।
उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं को उनका पूरा अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। यह संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए भी जरूरी है।
विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप
जिलाध्यक्ष महिला मोर्चा रागिनी सिंह ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि “नया भारत” की महिलाएं अब जागरूक और अपने अधिकारों के प्रति सजग हो चुकी हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” का विरोध कर महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।
‘आधी आबादी के सपनों का विरोध’
जिला उपाध्यक्ष राखी सिंह ने कहा कि विपक्ष का विरोध केवल एक विधेयक का नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के सपनों का विरोध है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महिलाएं नीति निर्धारण में भागीदारी के योग्य नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाएं अब अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ी हैं और किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं करेंगी।
महिलाओं को जागरूक होने की अपील
असिस्टेंट प्रोफेसर टीडी कॉलेज अंजना सिंह ने कहा कि महिलाओं को यह समझना होगा कि कौन उनके अधिकारों के समर्थन में खड़ा है और कौन विरोध में।
उन्होंने कहा कि अब महिलाएं अपने सम्मान और समान अधिकार के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं और यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
कार्यक्रम में सैकड़ों महिलाएं रहीं मौजूद
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने नारेबाजी कर अपने अधिकारों की मांग को मुखर किया। इस अवसर पर मैनिका सिंह, शशि मौर्य, विमला श्रीवास्तव, किरन मिश्रा, प्रीति गुप्ता, सारिका सोनी, वंदना सिंह और मिलन श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।



