“स्वच्छता पखवाड़ा 2026 और ज़मीनी हकीकत”
“शाही पुल और गोपी घाट की बदहाली”
जौनपुर। जौनपुर की जीवनदायिनी आदि गंगा गोमती के तट आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे ‘स्वच्छता पखवाड़ा-2026Ó और बड़े-बड़े दावों के बीच, शहर के घाटों पर खुले में शौच की तस्वीरें सरकार के ‘ओडीएफÓ दर्जे पर गंभीर सवाल खड़ा कर रही हैं।
“NGT के निर्देशों की अनदेखी”
जौनपुर के शाही पुल के आस-पास और गोपी घाट जैसे इलाकों में स्वच्छता अभियान की पोल खुलती नजर आ रही है। हाल ही में जिला गंगा समिति के तत्वावधान में छात्रों द्वारा जागरूकता रैलियां निकाली गईं, लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि कई मोहल्लों में सार्वजनिक शौचालयों की भारी कमी है। गोमती नदी पहले ही लखनऊ से जौनपुर के बीच ‘जहरीलीÓ घोषित की जा चुकी है। जौनपुर में सीधे नदी किनारे शौच और कचरा फेंकने से जलजनित बीमारियों का खतरा चरम पर है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इलाकों में शौचालय न होने या उनकी खराब स्थिति के कारण लोग खुले में जाने को मजबूर हैं। नगर पालिका जौनपुर के अनुसार, नालों पर अतिक्रमण और सफाई व्यवस्था को लेकर अप्रैल महीने में विशेष अभियान चलाने की योजना है, परंतु वर्तमान में नदी किनारे हो रही यह गंदगी प्रशासन की सतर्कता को चुनौती दे रही है।
अस्तित्व पर खतरा
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पहले ही अधिकारियों को जौनपुर में गोमती के नालों को टैप करने और नदी की पारिस्थितिकी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन धीमा है।
जनता का सवाल
क्या प्रशासन केवल ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2026’ की रैंकिंग सुधारने के लिए कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेगा, या गोमती के घाटों को वास्तव में इस गंदगी से मुक्ति मिलेगी? यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली गर्मियों में जल संकट और महामारियों का प्रकोप बढ़ना तय है।
जौनपुर की नगर पालिका द्वारा स्वच्छता के दावों के बावजूद ढालगरटोला और हीरालाल गली में गंदगी की गंभीर समस्या बनी हुई है। यह स्थानीय निवासियों के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रही है और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। ‘यह भी पढ़ें’…



