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हैप्पी मॉडल स्कूल में मिशन शक्ति जागरूकता कार्यक्रम

मुंगराबादशाहपुर के हैप्पी मॉडल पब्लिक स्कूल में थाना पुलिस ने मिशन शक्ति अभियान के तहत छात्राओं को महिला सुरक्षा, आत्मरक्षा, सरकारी योजनाओं और हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। पुलिसकर्मियों ने छात्राओं से छेड़छाड़ या उत्पीड़न की स्थिति में निडर होकर शिकायत करने की अपील की।

E-Paper 10-10-2026

Homeअपना जौनपुरस्वच्छ भारत के दावों की खुली पोल: गोमती किनारे कूड़े के ढेर,...

स्वच्छ भारत के दावों की खुली पोल: गोमती किनारे कूड़े के ढेर, लोगों का जीना हुआ दूभर

जौनपुर। एक तरफ देश में स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ जौनपुर शहर की हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। शहर में कचरा प्रबंधन की स्थिति दिन-ब-दिन बद से बदतर होती जा रही है।

ताजा मामला तूतीपुर घाट रोड और हनुमान घाट के पास का है, जहां गोमती नदी के किनारे खुलेआम कचरे के ढेर लगाए जा रहे हैं। यह न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि यहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है।

सरकार द्वारा बनाए गए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के तहत कचरे को ढककर सीधे प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाना अनिवार्य है, लेकिन जौनपुर में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। कूड़े को आबादी वाले इलाकों और धार्मिक स्थलों के पास जमा किया जा रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

हनुमान घाट जैसे पवित्र स्थल के पास कचरे का अंबार लगना प्रशासन की संवेदनहीनता को साफ दर्शाता है।

स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश

तूतीपुर रोड के निवासियों का कहना है कि कचरे से उठने वाली तेज दुर्गंध ने उनका जीना मुश्किल कर दिया है। बारिश के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जब कचरे का गंदा पानी रिसकर जमीन और नदी में मिल जाता है।

इससे न केवल जल प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी तेजी से फैल रहा है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए एमआरएफ सेंटर और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अब सवालों के घेरे में हैं। अगर कचरे का सही निस्तारण हो रहा है, तो फिर सड़कों और घाटों पर ये ढेर क्यों नजर आ रहे हैं?

क्या नगर पालिका प्रशासन उच्च न्यायालय और एनजीटी के निर्देशों को भूल चुका है? या फिर स्वच्छ भारत मिशन सिर्फ कागजों और विज्ञापनों तक ही सीमित रह गया है?अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते इस गंभीर समस्या पर ध्यान देगा, या फिर जौनपुर की जनता को ऐसे ही गंदगी और बीमारी के बीच जीना पड़ेगा?