जौनपुर धारा, शाहगंज। शिव महापुराण कथा सुनने से पाप में लिप्त लोगों को भी शिव के चरणों में स्थान मिल जाती है। यह प्रवचन उत्सव वाटिका शाहगंज संगत नगर में चल रही शिव महापुराण की कथा के दूसरे दिन कथावाचक संत रविशंकर महाराज गुरू भाई ने श्रोताओं से कहा। उन्होंने कहा कि जीवन के उद्धार के लिए शिव महापुराण कथा जरूर सुननी चाहिए। बुधवार को उन्होंने श्रद्धालुओं को चंचला और बिंदू की कथा सुनाई। इस दौरान रविशंकर महाराज ने कहा कि बिन्दू जाति से ब्राह्मण था, लेकिन ब्राह्मण के कर्तव्य का कोई काम नहीं करता था। जबकि, उसकी पत्नी चंचला सती सावित्री थी। बिंदू वैश्यावृति में पड़ गया, सारा धन वैश्या को दे देता, इससे पत्नी नाराज रहती थी, झगड़ा होता था। पति के न समझने पर चंचला भी वैश्यावृति में पड़ गई। इस पर बिंदू चंचला से मारपीट करता है तो चंचला कहती है कि आप भी तो नहीं समझते हैं। इस पर बिंदू का गुस्सा शांत हो जाता है। कुछ समय बाद बिंदू की मौत हो जाती है। उन्होंने कहा कि वृद्ध अवस्था में चंंचला परिवार के साथ यात्राओं के लिए निकल जाती है। एक मंदिर में शिव महापुराण कथा सुनने से उसके जीवन में परिवर्तन आता है और मरने के बाद शिवलोक में जगह मिलती है। वहां, माता पार्वती की सखी बनकर रहती है। एक दिन चंचला को पति की याद आई तो माता पार्वती बताती है कि आपका पति नरक में है। चंचला माता से पति बिंदू को परेशानी से बाहर निकालने की पुकार लगाती है। इस पर माता पार्वती गंद्धर्व लोक से तंबरों को विंध्य पर्वत पर रह रहे बिंदू को शिव महापुराण कथा सुनाने को कहती है। कथा सुनने से बिंदू पिशाच योनि से बाहर आ जाता है और भगवान शिव का गण बन जाता है। कथावाचक ने कहा कि शिव महापुराण कथा से जीवन धन्य हो जाता है और जब आप का विकास हो तो प्रभु के चरणों में जरूर पहुंचे। कथा शाम सात से रात्रि दस बजे तक चली। उक्त अवसर पर मनोज अग्रहरि, अरविंद अग्रहरी, माता प्रसाद मिश्र, विष्णु कांत अग्रहरि, संदीप अग्रहरि, ब्रजनाथ मोदनवाल, नागेश्वर मोदनवाल विजय अग्रहरी, बबीता चौरसिया, उज्जवल नाग, संध्या चौरसिया, अशोक मोदनवाल सहित तमाम श्रोता उपस्थित रहें।
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