- क्षेत्र में वसूली के बल धड़ल्ले से चलाये जा रहें अवैध कारोबार
जौनपुर धारा,जौनपुर। खाकी के संरक्षण में नगर कोतवाली अन्तर्गत पुरानी बाजार चौकी पुलिस के अवैध वसूली का मामला प्रकाश में आ रहा है। क्षेत्र से चन्द कदम की ही दूरी पर मल्हनी पड़ाव और अन्य अवैध कारोबार तेजी से पनप रहें हैं। जिसमें चौकी प्रभारी और उनके गिने-चुने कारखास पर धन उगाही का आरोप लग रहा है। बलिया में यूपी-बिहार बॉर्डर पर नरही थाना इलाके स्थित भरौली पिकेट और कोरंटाडीह चौकी पर ट्रकों से अवैध वसूली के मामले में तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी कार्रवाई कर दी थी, लेकिन अफसोस इस बात का है कि पुलिस विभाग इससे कोई सबक लेने को तैयार ही नहीं है। समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। पुलिस को देखकर अपराधियों में खौफ व आमजन अपनत्व का भाव आना चाहिए लेकिन, यहां मामला कुछ उलटा ही है। अवैध वसूली के साथ ही आमजन की शिकायतों का समय से निस्तारण न होने से खाकी पर दाग लग रहे हैं। यही नहीं, कर्तव्य निष्ठा पर भी सवाल उठ रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि कहीं न कहीं व्यवस्था में छेद है। यही नहीं आए दिन पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जुटने वाली पीड़ितों की भीड़ भी इस बात की गवाही देती है कि इन पीड़ितों की थाने पर सुनवाई नहीं की गई। इसी कारण पीड़ित घर से लंबा फासला तय कर एसपी सहित अन्य अधिकारियों के यहां अपनी पीड़ा के समाधान के लिए आने को विवश हो रहे हैं। सूत्रों की माने तो चौकी क्षेत्र में आने वाले तमात पड़ाव, आरा मशीन, गांजा बिक्री करने वालों की भरमार है, लेकिन उन सभी लोगों की स्थानीय पुलिस से अच्छी सेटिंग होने के नाते उनका गोरख धंधा रफ्तार पकड़ रहा है। इन मामलों में चौकी प्रभारी व उनके गिने-चुने कारखास अपने कार्यों का तमगा बटोर रहें है, जिससे न केवल खागी दागदार हो रही है बल्कि पूरा महकमा बदनाम हो रहा है। सूत्र तो यहाँ तक बतातें हैं कि उक्त चौकी से पहले तो छोटे-मोटे मामलों का गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया जाता है और फिर मुकदमा प्रतिवादी से लेन-देन कर धाराएं कम करने अथवा फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर धन उगाही का रास्ता बनाया जाता है, और यदि पार्टी पैसे देने से इंकार कर दे या मन मुताबिक पैसे न दे तो उसे गम्भीर धारा में जेल भी भेज दिया जाता है। इन मामलों से पुलिस की छवि खराब हो रही है। मामलें की जाँच कराई जाय तो कई ऐसे मामले सामने आयेंगे जिसमें चन्द पुलिस कर्मियों के चलते पूरे प्रदेश की पुलिस को गलत निगाहों से देखा जाता है। अब हालात कुछ यूं हो गये हैं कि आम जनता पुलिस को अपना रक्षक समझने के बजाय डरने लगी है। ऐसा ही चलता रहा तो प्रदेश के मुखिया के सपनों को कभी साकार नहीं किया जा सकेगा।



