जौनपुर। नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही अब शहरवासियों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ती नजर आ रही है। शहर के ढालगढ़ टोला और हीरालाल की गली जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पसरी गंदगी ने स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छ जौनपुर अभियान की पोल खोल दी है।
स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि सड़कों पर कूड़े के ढेर और बजबजाती नालियां प्रशासन के सफाई के दावों को खुली चुनौती दे रही हैं।
ढालगढ़ टोला में कचरे का अंबार
ढालगढ़ टोला क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें सफाई व्यवस्था की भयावह स्थिति को दर्शाती हैं। यहां खुले भूखंडों और मुख्य रास्तों पर कचरे का अंबार लगा हुआ है।
डस्टबिन की कमी या समय पर कचरा न उठने के कारण कूड़ा सड़कों तक फैल जाता है। इन कूड़े के ढेरों पर बेसहारा गोवंश और अन्य पशु दिन भर मुंह मारते देखे जा सकते हैं।
इससे न केवल संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ रहा है बल्कि पशुओं के आपस में लड़ने से दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
कोतवाली के पास गंदगी, संक्रमण का खतरा

चौंकाने वाली बात यह है कि नगर कोतवाली के पास स्थित नालियां कचरे और सिल्ट से भरी हुई हैं।
नालियों का काला और बदबूदार पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे राहगीरों का निकलना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद सफाई कर्मी गलियों के भीतर तक नहीं आते।
वहीं हीरालाल की गली में भी गंदगी का जमावड़ा बना हुआ है, जो मच्छरों के पनपने का मुख्य केंद्र बन गया है।
करोड़ों का बजट, फिर भी बदहाली
स्वच्छता के नाम पर नगर पालिका प्रशासन द्वारा हर साल करोड़ों रुपये का बजट खर्च दिखाया जाता है, लेकिन ढालगढ़ टोला और कोतवाली क्षेत्र की ये तस्वीरें व्यवस्था की लापरवाही और भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सफाई व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग दिखाई देती है।



