जौनपुर धारा, जौनपुर। सितम्बर का महिना आरम्भ होने के साथ ही गर्मी से लोगों को राहत मिलना शुरू हो गया। जौनपुर में भले ही बरसात अच्छी नहीं हुई लेकिन बांध का पानी छूटने के बाद गोमती का जलस्तर जिस तरह से बढ़ रहा है, तटीय स्थानों पर रहने वालों में डर बसने लगा है। एक ही रात में अचानक से नदी का पेटा भरने से नदी के किनारे रहने वालें दहशत में आ गये है। शविवार को नदी का जलस्तर 15 फीट से अधिक नापा गया है। हालांकि मध्य सितम्बर के साथ ही जौनपुर में अभी तक कुछ अच्छी बरसात देखने को मिली है। इस बीच गोमती नदी में नहाने और तैराकी करने पहुंचने वाले भी नदी की तरफ रूख करने से सहम रहें है। 24 घंटे में करीब एक मीटर की बढ़ोतरी होने से नदी का पानी खतरे के निशान से लगभग ढ़ाई मीटर ही दूर रह गया है। बाढ़ के पानी ने तराई क्षेत्रों के दर्जनों गांवों को घेर लिया है। नदी के जलस्तर में वृद्धि से घटों पर हो रहे सौदंरीकरण कार्य भी प्रभावित हो रहा है। नगर के तूतीपुर, बजरंग घाट, हनुमान घाट, गोपीघाट सहित आदि घाटों पर नदी के पानी ने सीढीयों को अपने आगोश में ले लिया है।
तेजी से बढ़ रहा गोमती का जलस्तर, सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न

जौनपुर धारा, खुटहन। प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में हुई जबरदस्त बारिश का तेज असर गोमती नदी में दिखाई देने लगा है। पिछले चौबीस घंटे के भीतर छह तटवर्ती गांवों के दर्जनों किसानों की सौ बीघे से अधिक धान की फ़सल जलमग्न हो गई है। इसमें बीस एकड़ से अधिक फसलें पानी में डूब चुकी हैं। जिसको लेकर किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। शाहपुर सानी गांव में गोमती नदी से निकला मोहारेबीर नाले में शुक्रवार की सुबह तक नदी का पानी आना शुरू हो गया था। नदी का पानी इतना तेजी से बढ़ रहा है कि चौबीस घंटों के भीतर सैकड़ों बीघा फसल को अपनी आगोश में ले लिया। शाहपुर सानी, अहियापुर, ग़ढा गोपालापुर, बड़ेरी, सियरावासी, महमदपुर, गुलरा आदि गांवों के किसानों को चिंता सताने लगी है कि यदि बढ़ाव ऐसे ही रहा तो खून पसीने से कमाई गई फसलो को बचा पाना मुश्किल हो जायेगा। यही हाल रहा तो रिहायशी बस्तियों तक पानी पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। किसान उस भयावह स्थिति की कल्पना मात्र से परेशान हैं। पानी इसी गति से बढ़ता रहा तो रविवार तक नाले की पुलिया के पास बना रमाशंकर यादव इंटर कालेज में भी प्रवेश कर जायेगा। गांवों के किसान हर्षू पाठक, गिरजा यादव, शंकर सिंह, मुरारी मिश्रा, रमाशंकर यादव, अमरनाथ तिवारी, लालबहादुर यादव आदि किसान फसलों की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं। किसानों का आरोप है कि फसले डूब जाने के बाद भी प्रशासनिक अमले का कोई जिम्मेदार किसानों की सुध लेने मौके पर नहीं आया।



