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Homeअपना जौनपुर12वें पड़ाव पर सत्संग में पंकज महराज ने पढ़ाया शाकाहार का पाठ

12वें पड़ाव पर सत्संग में पंकज महराज ने पढ़ाया शाकाहार का पाठ

जौनपुर। बाबा जयगुरुदेव महाराज द्वारा सन् 1970 के दषक में कही गई भविष्यवाणियों से अवगत कराते एवं उनसे बचने, बचाने की युक्ति समझाते हुये जयगुरुदेव संस्था, मथुरा के उत्तराधिकारी संत पंकज महाराज सिकरारा ब्लाक के ग्राम हरिगांव सेमरी 92वें पड़ाव पर बड़ी संख्या में दीप प्रज्वलित कलशों, बाजे-गाजे एवं फूल मालाओं से स्थानीय भाई-बहनों एवं बच्चों ने स्वागत किया। अपने सत्संग सन्देश में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि ना जाने किस महात्मा की दया हो गई जो आपको यह मनुष्य शरीर मिल गया। इसे देव दुर्लभ मानव तन तथा अषरफुल मखलूकात भी कहा गया है। इसी में प्रभु के पास जाने का एक दरवाजा है जिसे तीसरा तिल, ज्ञान चक्षु, शिव नेत्र और थर्ड आई भी कहा गया है। जब हिन्दू, मुसलमान के पैदा होने का परमात्मा ने एक ही रास्ता बनाया है तो आप कैसे कह सकते हैं कि मालिक से मिलने का मुसलमान, भाईयों के लिये कोई अलग रास्ता बनाया होगा? दोनों आंखों के बीच में एक आंख है जिसे दिव्य आंख भी कहते हैं। उसी मुकाम तक प्रभु की देववाणी, अनहदवाणी या कलमा ए इलाही आती है। उस वेदध्वनि को सुनने को एक तीसरा कान भी इसी मनुष्य शरीर में है, लेकिन इसका भेद आप तब तक नहीं जान सकते जब तक कोई जीते जागते सन्त-महात्मा न मिल जायें। संस्थाध्यक्ष ने शराब को अपराध की जननी बताते हुये कहा कि जो शराब पीता है वह झूठ बोलता है, धोखा देता है, मारपीट करता है, झूठी गवाहियां देता है, कत्ल कर देता है, मां, बहन, बेटी की पहचान खतम कर देता है और भी न जाने क्या, क्या कर देता है।