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शिक्षा विभाग की अनदेखी के चलते 164 बच्चों का भविष्य अंधकारमय

  • मुंगराबादशाहपुर नगर के सिपाह मोहल्ले में एक शिक्षक के भरोसे चल रहा है राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल

जौनपुर धारा, मुंगराबादशाहपुर। जहां बच्चों की शिक्षा को लेकर सरकार विभिन्न अभियान चलाकर उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करने का कार्य कर रही है, वहीं मुंगराबादशाहपुर नगर के सिपाह मोहल्ले में स्थित राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल में शिक्षा विभाग के अनदेखी के चलते बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। बताते चलें कि जौनपुर जिले के मुंगराबादशाहपुर नगर के सिपाह मोहल्ले में स्थित राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही से 164बच्चों का भविष्य अंधकार में है। एक शिक्षक के भरोसे पूरा स्कूल चल रहा है यह लापरवाही पिछले कुछ सालों से देखने को मिल रही है। जिससे बच्चों की विभिन्न विषयों की पढ़ाई अवरुद्ध हो रही है और उनका भविष्य चौपट भी हो रहा है। स्कूल की आठ कक्षाओं में 164विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं उनको हर सभी विषयों को पढ़ा पाना एक शिक्षक के बस की बात नहीं है और मानक के अनुसार यहाँ नौ शिक्षकों की नियुक्ति होना चाहिए। विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक राजमणि ने बताया कि विद्यालय में 164 बच्चे हैं और मार्च 2019 से किसी शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई है। बच्चों की संख्या के हिसाब से नौ शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए। यह सारी बातें एबीएसए और बीएसए को भी बताई गई है। लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं और न ही शिक्षकों की कमी आज तक पूरी नहीं हुई है। वहीं अब शिक्षा विभाग की अनदेखी के कारण बच्चों का भविष्य अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है और पिछले तीन सालों से विद्यालय एक ही अध्यापक के भरोसे चल रहा है। विभिन्न विषयों के शिक्षकों की कमी पूरी न होने के कारण अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है और एक शिक्षक अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाने का काम कर रहे है। लेकिन यह अकेले एक अध्यापक के बस की बात नहीं है। विभागीय अधिकारियों के उदासीनता के कारण बच्चों का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है। स्कूल में नियुक्त शिक्षक ज्यादातर समय कामकाज मध्यान्ह भोजन की देखरेख में निकल जाता है और वह अकेले कहाँ तक इतने बच्चों को संभाल पाएंगे। इस सम्बंध में बीएसए जौनपुर ने बताया कि जल्द ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा। लेकिन कब होगा इसका जवाब नहीं दे पाए और बच्चों के भविष्य को लेकर अभिभावकों ने चिंता जाहिर की है।

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