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डीएम ने यूनियन बैंक का किया औचक निरीक्षण

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विकास से कोसों दूर है सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र का यह गांव

रायबरेली. विकास के बड़े-बड़े दावे करने वालों के लिए सोनिया गांधी का संसदीय क्षेत्र रायबरेली सबको मुंह चिढ़ा रहा है. कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, रामपुर बघेल गांव के लोग आजादी के 70 साल से ज्यादा का वक्त गुजर जाने के बाद भी लकड़ी के पुल पर सफर करने को मजबूर है. रायबरेली के सदर तहसील के अमावा ब्लाक स्थित रामपुर बघेल गांव कि लगभग छह हजार की आबादी इस लकड़ी के अस्थाई जर्जर पुल से जान हथेली पर लेकर सफर करने को मजबूर है.

ग्रामीणों ने अपनी समस्या को रायबरेली के सभी जिम्मेदार अधिकारियों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों से भी बताई, लेकिन उनकी इस समस्या का समाधान आज तक कोई भी खोज नहीं पाया और उनकी यह समस्या ज्यों की त्यों बरकरार है. ग्रामीणों का कहना है कि वह हर बार इसी तरह अस्थाई पुल का निर्माण करते हैं, जो कुछ दिन चलता है और अगर तेज बारिश हो गई तो वह भी बह जाता है. जिसके बाद उन्हें जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए 15 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता है. सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं और मरीजों को उठानी पड़ती है, क्योंकि अगर कोई इमरजेंसी हो जाए तो उन्हें लगभग 15 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके जिला अस्पताल एवं जिला मुख्यालय आना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि उनके लिए एक आदद पुलिया का निर्माण करा दें तो उनकी समस्या का समाधान हो जाए. लेकिन कोई भी जनप्रतिनिधि और अधिकारी ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील नहीं है. गांव के रहने वाले रमाकांत द्विवेदी का कहना है कि हम लोग की तीन पीढ़ियां बीत चुकी हैं और हम लोग लगातार इस कोशिश में लगे हुए हैं कि हमारे गांव के लिए एक पुल या एक पुलिया बन जाए. हम लोगों ने इसके लिए बहुत कोशिश की डिप्टी सीएम तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई. वहीं दूसरे ग्रामीण राज नारायण मौर्य का कहना है कि हम लोग कई बार से चुनाव बहिष्कार का एलान कर चुके है. अधिकारी उस वक्त आ कर समस्या के समाधान का दावा करते हैं, लेकिन फिर मामला टाय-टाय फिस्स हो जाता है.

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