इलाहाबाद. पूरब का ऑक्सफोर्ड कही जाने वाली इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी सोमवार देर शाम जंग का मैदान बन गयी. इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में पूर्व छात्र विवेकानंद पाठक और यूनिवर्सिटी के सिक्योरिटी गार्डों के बीच हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद 4 गुना फीस वृद्धि के विरोध में 101 दिनों से आमरण अनशन कर रहे छात्र भी बवाल में कूद पड़े. करीब 2 घंटे तक यूनिवर्सिटी कैंपस में तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा होती रही. इस सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची. खुद पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा, एडिशनल पुलिस कमिश्नर आकाश कुलहरि और डीएम संजय खत्री को मोर्चा संभालना पड़ा. इसके बावजूद आक्रोशित छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसमें दर्जनों छात्रों के साथ ही पुलिसकर्मियों, मजिस्ट्रेट और मीडिया कर्मियों को भी चोटें आई हैं.
बवाल के दौरान उपद्रवियों ने कई वाहनों में तोड़फोड़ की और कई वाहनों को आग के हवाले भी कर दिया. इस दौरान उपद्रवियों ने यूनिवर्सिटी की कैंटीन को भी आग के हवाले कर दिया. सैकड़ों छात्रों के हुजूम को देखते हुए पुलिस भी असहाय नजर आ रही थी. हालांकि, मौके पर आस पास के थानों की फोर्स के साथ ही बड़ी संख्या में पीएसी को भी बुला लिया गया था. करीब 2 घंटे तक चले बवाल और अराजकता के बाद हालात पर काबू पाया जा सका. दरअसल, पूरा मामला उस वक्त बिगड़ा जब पूर्व छात्र विवेकानंद पाठक यूनिवर्सिटी कैंपस में यूनियन हाल के गेट पर पहुंचे थे. उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से गेट खोलने के लिए कहा. उनके मुताबिक वे कैंपस के अंदर स्थित बैंक जाना चाहते थे. सुरक्षाकर्मियों के गेट न खोलने की वजह से विवाद हो गया, जिसके बाद आरोप है कि यूनिवर्सिटी के सुरक्षा गार्डों ने मिलकर विवेकानंद पाठक की पिटाई कर दी. उनके सिर में चोट आई और खून बहने लगा. आरोप है कि इस बीच कुछ सुरक्षाकर्मियों ने कई राउंड फायरिंग भी कर दी. इससे पिछले 101 दिनों से 4 गुना फीस वृद्धि के विरोध में आमरण अनशन कर रहे छात्रों का गुस्सा भड़क उठा. छात्रों ने फोन कर डेलीकेसी और हॉस्टल से अन्य छात्रों को भी बुला लिया, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों द्वारा मारपीट और फायरिंग से नाराज छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच पत्थरबाजी शुरू हो गई. देर शाम पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा, एडिशनल पुलिस कमिश्नर आकाश कुलहरि और डीएम संजय खत्री ने छात्रों की ओर से तहरीर लेकर उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद छात्रों का गुस्सा शांत हुआ. पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा के मुताबिक घायल पूर्व छात्र विवेकानंद पाठक का मेडिकल कराया जा रहा है. उनके मुताबिक तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर वीडियो फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी. उन्होंने कहा है कि छात्रों से संवाद किया गया है और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है. पुलिस कमिश्नर के मुताबिक अराजक तत्वों ने 2 वाहनों में आग लगाई है. जबकि कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई है. वहीं छात्रों की मांग है कि दोषी सिक्योरिटी गार्डों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए. जबकि इस पूरे मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बयान जारी कर सफाई दी है.
यूनिवर्सिटी ने नकारे सारे आरोप
यूनिवर्सिटी की ओर से पीआरओ प्रोफेसर जय कपूर चड्ढा ने सुरक्षाकर्मियों पर फायरिंग के लगाए जा रहे आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है. उन्होंने कहा है कि यूनिवर्सिटी कैंपस में कुछ अवैध छात्र प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे. सुरक्षाकर्मियों द्वारा उन्हें रोके जाने पर अवैध छात्रों ने ही उनके साथ मारपीट की है. उनके मुताबिक दोपहर करीब 2:30 बजे विवेकानन्द पाठक, सत्यम कुशवाहा, अजय सिंह, आशुतोष पटेल उर्फ राहुल पटेल, हरेन्द्र यादव, अभिषेक यादव, नीरज प्रताप सिंह एवं अन्य सैकड़ों अज्ञात अराजक तत्त्वों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में उपद्रव करते हुए वाहनों की तोड़फोड़-आगजनी की है. इसके साथ ही सुरक्षाकर्मियों को पत्थरों से गंभीर चोट पहुंचायी है. यूनिवर्सिटी की पीआरओ ने आरोप लगाया है कि अवैध छात्र विवेकानंद पाठक ने कुछ अराजक तत्त्वों के साथ मिलकर यूनियन हाल के पास के गेट में लगे ताले को तोड़कर वहां तैनात सुरकक्षाकर्मी को थप्पड़ मारा. इसके बाद पूरा बवाल शुरू हुआ. अवैध छात्रों ने सुरक्षाकर्मी के गेट खोलने पर मना करने पर उसे मारा पीटा, जिससे उसे काफी चोटें आयी और बलपूर्वक ताला भी तोड़ दिया.
कई गार्ड घायल हुए
पीआरओ का कहना है कि घटना की सूचना फ़ोन पर प्रयागराज पुलिस को दी गई है. उनके मुताबिक पूरे परिसर में हुए नुकसान की समीक्षा की जा रही है. यूनिवर्सिटी पीआरओ के मुताबिक दो चार पहिया वाहनों में तोड़फोड़ की जानकारी है जबकि दो बाइकों में आग लगाई गई है. जबकि हिंसा और बवाल में लगभग एक दर्जन सुरक्षा गार्ड घायल हैं. इसके साथ ही कैंटीन को भी जला दिया गया है. पीआरओ के मुताबिक, विश्वविद्यालय में इस घटना से यूनिवर्सिटी में भय एवं दहशत का वातावरण उत्पन्न हो गया , जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. यूनिवर्सिटी में बवाल हिंसा को देखते हुए मंगलवार 20 दिसंबर को कुलपति के आदेश से कैंपस बंद कर दिया गया है, हालांकि कक्षाएं पहले से स्थगित थी, लेकिन इस आदेश के बाद यूनिवर्सिटी के कार्यालय भी बंद रहेंगे.



