आपने फिल्मों में मां और बच्चे के बिछड़ने की कई कहानियां देखी और सुनी होंगी, लेकिन असल जिंदगी में भी कुछ ऐसी ही कहानियां देखने को मिलती हैं. ऐसी ही एक बाघिन मां और उसकी बेटी की कहानी जंगल में देखने को मिली. जहां अपनी मां से दूर होकर छह महीने की शाविका का बुरा हाल हो गया. वो चारों ओर कई दिन तक अपनी मां को ढूंढती रही, लेकिन उसकी मां उससे मिलने नहीं आई. जिसके बाद उसकी लगातार खराब हालत को देखते हुए वन विभाग के द्वारा उसे कानपुर चिड़ियाघर लाये जाने का निर्णय लिया गया. यहां नन्हीं शाविका का इलाज हो रहा है जिससे वो पहले से बेहतर नजर आ रही है.मात्र छह महीने की उम्र और मां से बिछड़ने से ज्यादा बुरा और क्या हो सकता है. चाहे वो इंसान हो या बेजुबान जानवर, मां हर किसी के लिए जरूरी होती है. कानपुर चिड़ियाघर के उपनिदेशक और मुख्य पशु अधिकारी डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पास उदयपुर गांव के पास कई दिनों से यह नन्हीं शाविका देखी जा रही थी. वहां के ग्राम प्रधान ने इसकी सूचना वन विभाग को दी, जिसके बादरेस्क्यू टीम वहां पहुंची. टीम ने बाघिन मां और उसकी बेटी को मिलाने की तैयारी की.रेस्क्यू टीम को उम्मीद थी कि मां अपनी बेटी को लेने आएगी. इसके लिए 10 दिन तक इंतजार किया गया, लेकिन बाघिन उसे लेने नहीं आई. जिसके बाद नन्हीं शाविका की हालत को देखते हुए उसे कानपुर चिड़ियाघर लाए जाने की तैयारी की गई. शाविका डरी और सहमी हुई थी जिस वजह से न तो वो कुछ खा रही थी. इसके कारण वो कुपोषण का शिकार हो गयी थी. कानपुर चिड़ियाघर में लाये जाने के बाद डॉक्टर उसका इलाज कर रहे हैं जिससे उसके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है. शाविका ने अब खाना भी शुरू कर दिया है.इस नन्हीं शाविका को पूर्णिमा के दिन रेस्क्यू किया गया था, इसलिए पूर्णिमा के पर्यायवाची लूनर पर इसका नाम लूना रखा गया है. जहां एक ओर उसे कानपुर चिड़ियाघर में एक नया नाम मिला है. तो वहीं, अब उसको चिड़ियाघर के जानवरों के रूप में एक नया परिवार भी मिला है. कुछ दिन तक लूना डॉक्टरों की देखरेख में रहेगी. जब उसकी सेहत बेहतर हो जाएगी तब वो दर्शकों का मनोरंजन करेगी. दर्शक इस नन्हीं शाविका को देखकर खुश होंगे.
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चिड़ियाघर पहुंची मां से बिछड़ी नन्हीं शाविका



