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चार दिवसीय चीन यात्रा का विदेश मामलों के एक्सपर्ट विश्लेषण कर रहे आसिम मुनीर

पाकिस्तान के नए सेनाध्यक्ष जनरल आसिम मुनीर अपने पहले चीन दौरे पर बीजिंग पहुंचे हैं. आसिम का यह दौरा 4 दिन का है, इसके पहले वो UAE और सऊदी अरब की विजिट कर चुके हैं. हालांकि वे उन दोनों इस्लामिक मुल्कों में इतने दिनों के दौरे पर नहीं गए थे. ऐसे में उनकी चार दिवसीय चीन यात्रा का विदेश मामलों के एक्सपर्ट विश्लेषण कर रहे हैं. पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उनके सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर चीन के अफसरों से दोनों देशों के मिलिट्री रिलेशन्स ज्यादा मजबूत करने पर चर्चा करेंगे. वहीं, कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि मुनीर का यह इतना लंबा दौरा चीन से पाकिस्तान को मिले आर्थिक पैकेज में राहत पाने के लिए है. वहीं, कुछ जानकार इसे भारत से जोड़कर भी देख रहे हैं. जानकारों की मानें तो पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष अपने चीन दौरे पर चीनी सेना के अधिकारियों से भारत के खिलाफ भी बात करेंगे.

भारत से दोनों-देशों का चल रहा सीमा विवाद

गौरतलब है कि भारत का चीन और पाकिस्तान दोनों से जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के भू-भाग को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है. इन दोनों देशों ने जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख प्रांत की हजारों वर्ग किमी जमीन हथिया रखी है. इन देशों का जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के आधे से अधिक भू भाग पर कब्जा है. अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख को दो टुकड़ों में बांटने से पहले तक यह एक ही राज्य होता था, भारत ने उस दौरान आर्टिकल-370 को निष्क्रिय किया था. जम्मू कश्मीर राज्य का पूरा क्षेत्रफल 222,236 वर्ग किमी था, जिसकी 1 लाख वर्ग किमी से भी ज्यादा भूमि चीन और पाकिस्तान के कब्जे में है. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को ‘पीओके’ कहा जाता है. वहीं, हमारा जो इलाका चीन के कब्जे में है, उसे ‘अक्साई चिन’ कहते हैं. पाकिस्तान के सीनियर जर्नलिस्ट मुर्तजा सोलंगी ने कहा कि चीन की मिलिट्री लीडरशिप भी वहां की सरकार की तरह है. दोनों के ही बारे में बहुत ज्यादा चीजें सामने नहीं आतीं. वहीं, भारतीय रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान भी एक ऐसा मुल्क है जहां सेना वहां के सियासी चेहरों से ज्यादा ताकतवर है, और सेना क्या कुछ करती है, वो वहां के हुक्मरानों को भी पता नहीं चलता. अब जबकि, वहां के सेनाध्यक्ष चीन दौरे पर गए हैं तो इस बारे में वहां की सरकार और फौज खामोश हैं. अब मुनीर के दौरे के बारे में यह देखना होगा कि यह मामला सिर्फ सैन्य संबंधों तक रहेगा या उससे कुछ और हासिल होना है.

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