- डा.लाल बहादुर सिद्धार्थ ने कड़ी मशक्कत के बाद बचाई जान
जौनपुर। गेम खेलने के लिए मोबाइल न मिलने पर बीएससी की एक छात्रा ने धारदार वस्तु से खुद का गला रेत डाला। श्वांस एवं खाने की नली एक साथ कटने से पलभर में उसकी हालत चिंताजनक हो गयी। परिजनों ने गंभीर रूप से घायल छात्रा को लेकर सीधे सर्जन डॉ.लाल बहादुर सिद्धार्थ के अस्पताल पर ले गये। त्वरित सही उपचार मिलते ही उसकी जान बच गयी। हालंकि अभी भी वह अस्पताल में भर्ती है परन्तु पूरी तरह खतरे से बाहर है। मिली जानकारी के अनुसार बक्शा थाना क्षेत्र के ग्रामसभा लखऊवां अपने नाना के घर रहकर मोहम्मद हसन कालेज से बीएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रही 19वर्षीय खुशबू की बीते शुक्रवार की शाम मोबाइल पर गेम खेलने को लेकर छोटी बहन से बहस हो गयी। घटना के समय घर पर सिर्फ दोनों बहनें ही मौजूद थी। जब छोटी बहन ने मोबाइल देने से इंकार कर दिया तो वह तैश में आकर दूसरे कमरे में चली गयी और पास में रखे सब्जी काटने वाले चाकू से अपना ही गर्दन रेत दिया। घटना के बाद वह खून से लथपथ वही पड़ी थी। काफी देर बाद जब मामले की जानकारी हुई तो इसकी सूचना घर सुल्तानपुर दी गयी। पिता संतोष यादव किसी तरह एक घण्टे के अंदर खरौना पहुंचा और बेहोश पड़ी बिटिया को लेकर रात्रि लगभग नौ बजे सिद्धार्थ हॉस्पिटल पहुंच गया। संयोग अच्छा था कि उस समय अस्पताल के सर्जन डॉ.लाल बहादुर सिद्धार्थ ऑपरेशन थियेटर में सर्जरी कर रहे थे। डॉक्टर ने अपनी टीम के साथ घंटों अथक प्रयास कर अंदर से कई राउंड टांका लगाकर गला सही कर दिया। जिससे उसकी जान-जाने से बच गयी। इस बावत पूछे जाने पर डॉ.सिद्धार्थ ने बताया कि अगर हम रिस्क न लेते तो उसकी जान किसी भी कीमत पर न बचती। क्योंकि अत्यधिक खून तो निकला ही था। जो निकल रहा था अगर वह फेफड़े में चला जाता तो नसे ब्लाक होने से उसकी सांस रूक जाती। अगर वह ज्यादा नहीं आधे घंटे भी यहां पहुंचने में लेट करती तब भी नहीं बच पाती। फिलहाल वह अब पूरी तरह खतरे से बाहर है। उधर अपनी बिटिया को ठीक देख पूर्व में जिस माँ-बाप के आँखों से बह रहे आँशू रूकने का नाम नहीं ले रहे थे, वह अब खुशी के ऑशू बहा रहे है।



