जौनपुर। शाकाहार-सदाचार मद्यनिशेध एवं आध्यात्मिक-वैचारिक जनजागरण यात्रा कल सायंकाल डोभी ब्लाक के ग्राम रेहारी में अपने 45वें पड़ाव पर पहुंची। सत्संग सभा में पंकज महाराज ने रामचरित मानस की चौपाई च्च्सन्त मही विचरत केहि हेतू। जड़ जीवन कँह करत सचेतू।ÓÓ को उद्धृत करते हुये कहा सन्त महात्मा बहुत दयालु होते हैं। जिस प्रकार विद्यार्थी विद्याध्यन के लिये विद्यालय जाते हैं, उसी प्रकार सन्तों महात्माओं का सत्संग आध्यात्मिक पाठशाला है। वह समझाते हैं कि गृहस्थ आश्रम में रहकर अपना काम मेहनत ईमानदारी से करें, परिवार का पालन पोषण करें तथा थोड़ा सा समय निकाल कर भगवान का भजन भी करें। गाना, बजाना, ढोल, मंजीरा यह भजन नहीं है यह तो भजन की नकल है। भजन तो प्रभु के देष से आ रही, आकाशवाणी, अनहदवाणी को आत्मा के तीसरे कान से सुनने को कहते हैं। इसी को सन्त कबीर साहब ने कहा च्च्हम तो बचि गये साहब दुआ से, शब्द डोर गहि उतरे पार, कहा है। इस कलियुग में जीवात्माओं को भव से पार लगाने के लिये दयालु प्रभु ने संतों को भेजा उन्होंने यहां प्रभु प्राप्ति की सरल साधना सुरत शब्द योग जारी किया। उन्होंने कहा मांसाहार के कारण जब पशु-पक्षियों के बैक्टीरिया मानव शरीर के अन्दर पहुंच जायेंगे तो तरह-तरह की बीमारियां पैदा हो जायेंगी। विख्यात सन्त बाबा जयगुरुदेव ने आवाज लगाई कि इन्सानों अपने मानव धर्म पर वापस आ जाओ तथा इस शरीर रूपी मंदिर में बैठकर भगवान की सच्ची पूजा करो जिससे आप की आत्मा नर्कों में जाने से बच जाय। इस अवसर पर ऋशिदेव श्रीवास्तव, विद्यालय प्रबन्धक वीरेन्द्र प्रताप सिंह, प्राचार्य गजराज सिंह, महेन्द्र प्रताप सिंह, ओम प्रकाश मौर्य, रमेश चन्द नागर, अखिलेष सिंह, सहयोगी संगत गाजीपुर के इन्द्रदेव यादव, जनार्दन कुषवाहा, महेश यादव, मुसई कुशवाहा, पटेल पाल, राम सेवक मौर्य, उमाशंकर यादव आदि उपस्थित रहे।
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आध्यात्मिक पाठशाला है सन्तों व महात्माओं का सत्संग : पंकज महाराज



