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अपराधी को दण्ड देना ही नहीं, सुधार की दिशा भी विधि का उद्देश्य : हरि किशोर सिंह

  • तिलकधारी विधि महाविद्यालय में नए आपराधिक कानूनों पर जागरूकता संगोष्ठी

जौनपुर। तिलकधारी विधि महाविद्यालय, पीली कोठी में मंगलवार को ‘नए आपराधिक कानूनों के प्रति जागरूकताÓ विषय पर अनुसंधान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.राजेश कुमार सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि हरि किशोर सिंह, संयुक्त निदेशक अभियोजन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में न्यायविद् श्यामबर द्विवेदी(ए.डी.सी.) उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। स्वागत गीत एल.एल.एम. की छात्रा रिचा सिंह और एल.एल.बी. की छात्रा भव्या प्रज्ज्वल ने प्रस्तुत किया। प्राचार्य प्रो.राजेश कुमार सिंह ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि ‘कानून समाज को सुरक्षित करने का माध्यम है, जो व्यक्ति के जीवन, संपत्ति और सम्मान की रक्षा करता है।Ó मुख्य अतिथि हरि किशोर सिंह ने कहा कि ‘अपराधी को दंड देना ही विधि का उद्देश्य नहीं है, बल्कि उसके जीवन में सुधार लाना भी न्याय व्यवस्था का मूल लक्ष्य होना चाहिए।Ó उन्होंने कहा कि उपभोक्तावाद के बढ़ते प्रभाव के बीच समाज में स्वस्थ और संतुलित जीवन मूल्यों की स्थापना आवश्यक है।प्रो. संतोष कुमार सिंह ने कहा कि पहली बार भारतीय न्याय प्रणाली को औपनिवेशिक सोच से मुक्त कर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के रूप में नया स्वरूप दिया गया है। विशिष्ट अतिथि श्यामबर द्विवेदी ने कहा कि  ‘नए कानूनों से आत्मविश्वास बढ़ेगा और न्याय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।Ó उन्होंने साइबर अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग, मानव तस्करी, वित्तीय धोखाधड़ी और सामाजिक अपराधों पर विस्तृत चर्चा की।कार्यक्रम का सफल संचालन रिचा अंजलि मिश्रा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रतन चंद्र मौर्य ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डी.ओ. शैलेन्द्र यादव, डी.ओ. अरविन्द सिंह, डी.ओ. अर्पणा सिंह, डी.ओ. चन्द्र प्रताप सिंह सहित अनेक विधि प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विधि विद्यार्थियों की उपस्थिति और सहभागिता सराहनीय रही।