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Homeअपना जौनपुरहाईटेक कैमरों की ‘तीसरी आँख’ भी खाकी के आगे अंधी!

हाईटेक कैमरों की ‘तीसरी आँख’ भी खाकी के आगे अंधी!

जौनपुर। शहर की सड़कों पर यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासन ने हाईटेक कैमरों की व्यवस्था को ‘स्मार्ट सिस्टम’ के रूप में लागू किया है। इन कैमरों का उद्देश्य है कि नियम तोड़ने वालों का ऑटोमेटिक चालान सीधे उनके मोबाइल पर भेजा जाए।

लेकिन इस आधुनिक व्यवस्था के बीच अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह तकनीक सिर्फ आम जनता के लिए ही काम कर रही है?

आम जनता पर सख्ती, नियमों की सच्चाई पर सवाल

शहर के प्रमुख चौराहों पर लगे कैमरे हेलमेट न पहनने और सीट बेल्ट न लगाने वालों को तुरंत पकड़ लेते हैं। कुछ ही सेकंड में चालान जारी हो जाता है।

लोगों का कहना है कि यह तकनीक शायद “सिर पर हेलमेट” देखती है, लेकिन व्यवस्था की असली खामियों पर नजर नहीं डालती।

खाकी पर क्यों नहीं दिखती ‘तीसरी आँख’?

दूसरी तरफ यह आरोप भी सामने आ रहे हैं कि पुलिस और सरकारी वाहन अक्सर खुद ही यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आते हैं।

  • बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाना
  • बिना नंबर प्लेट के सरकारी वाहन
  • नियमों की अनदेखी करते अधिकारी

ऐसे मामलों में कैमरे या तो काम नहीं करते या फिर नजरअंदाज हो जाते हैं।

क्या तकनीक सिर्फ आम नागरिकों के लिए?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कैमरे इतने एडवांस हैं कि आम जनता का चालान सेकंडों में कर देते हैं, तो क्या यही सिस्टम नियम तोड़ने वाले वर्दीधारियों को नहीं देख पाता?

लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी बढ़ रही है कि सिस्टम में समानता की कमी दिख रही है।

प्रशासनिक जवाबदेही पर उठते सवाल

अब जनता यह सवाल उठा रही है कि क्या यातायात विभाग अपने ही विभाग के लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की हिम्मत रखता है या नहीं।

अगर तकनीक वास्तव में निष्पक्ष है, तो नियम सबके लिए बराबर होने चाहिए—चाहे आम नागरिक हो या खाकी वर्दीधारी।

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