जौनपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय प्रशांत कुमार सिंह ने अवगत कराया है कि ‘पाक्सो एक्ट, पॉश एक्ट, शिक्षा का अधिकार, नशा मुक्ति, महिलाओं के अधिकार, नि:शुल्क विधिक सहायता, बालक एवं बालिकाओं के कल्याण हेतु संचालित योजनाओंÓ पर बुधवार को ‘राधा कृष्ण इण्टर कालेज प्रेमपुर में विधिक साक्षरता/जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर को सम्बोधित करते हुए प्रशान्त कुमार सिंह ने बताया कि पॉश अधिनियम का मतलब है कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम 2013 यह भारत में एक कानून है। जो कार्यस्थलों पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने, निषेध करने और उसका निवारण करने के लिए बताया गया है। इसके तहत संगठनों को एक सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करना होता है, और यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए एक आंतरिक शिकायत समिति बनानी होती है। पोक्सो एक्ट एवं प्राधिकरण के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला और अधिक से अधिक वादों का निस्तारण मध्यस्थता के द्वारा और राष्ट्रीय लोक अदालत के द्वारा निस्तारित करने पर बल दिया। डिप्टी चीफ, लीगल एड डिफेंस काउंसिल डॉ.दिलीप कुमार सिंह ने बताया गया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण को वैकल्पिक प्रणाली के रूप में 1987 के दशक में बनाया गया। जिसके मुख्य दिशा निर्देशक जस्टिस पी.एन.भगवती और जस्टिस वी कृष्णा अययर थे। उन्होंने बताया कि किस तरह से संपूर्ण भारत के हर जनपद में स्थापित प्राधिकरण में मध्यस्थ, पैनल लॉयर, काउंसलर डिफेंस लीगल सिस्टम, पराविधिक स्वयं सेवक, फ्रण्ट ऑफिस वैवाहिक प्रीलिटिगेशन वाद और अन्य से किस प्रकार नि:शुल्क सहायता और जागरूकता प्राप्त की जा सकती है।
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E-Paper 10-06-2026
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सत्र न्यायाधीश ने महिलाओं को किया जागरूक


