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Homeअपना जौनपुरदेश की स्वतंत्रता के साथ आत्मिक जागृति का पावन पर्व

देश की स्वतंत्रता के साथ आत्मिक जागृति का पावन पर्व

जौनपुर। सम्पूर्ण भारतवर्ष ने जहां स्वतंत्रता के 79वां गौरवशाली वर्ष का उत्सव मनाया, वहीं संत निरंकारी मिशन ने मुक्ति पर्व को आत्मिक स्वतंत्रता के रूप में श्रद्धा और समर्पण से भव्यतापूर्वक आयोजित किया। मुक्ति पर्व समागम का आयोजन जनपद के मड़ियाहूं पड़ाव स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन व जनपद के 16ब्रांचों पर आयोजित किया गया। निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज के पावन संदेशों को बताते हुए श्याम लाल साहू (संयोजक) ने कहा कि आज विश्वभर में मिशन की सभी शाखाओं में भी मुक्ति पर्व के अवसर पर विशेष सत्संग का आयोजन कर इन दिव्य संतों को नमन किया गया। श्रद्धालुजनों ने शहनशाह बाबा अवतार सिंह, जगत माता बुद्धवंती, राजमाता कुलवंत कौर, माता सविंदर हरदेव, भाई साहब प्रधान लाभ सिंह एवं अन्य अनेक समर्पित भक्तों को हृदय से स्मरण कर उनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त की। आध्यात्मिकता के इस पावन वातावरण में समस्त श्रद्धालुजनों को निरंकारी राजपिता के संदेशों को बताते हुए फरमाया कि 15अगस्त को जहाँ देश आज़ादी का पर्व मना रहा है, वहीं संतजन इसे मुक्ति पर्व के रूप में आत्मचेतना और भक्ति के संदेश के साथ मना रहे हैं। जैसे झंडा और देशभक्ति गीत आज़ादी के प्रतीक हैं, वैसे ही एक भक्त का जीवन सेवा, समर्पण और भक्ति की महक से भरा होता है। जगत माता, शहंशाह, राजमाता, माता साविंदर एवं अनेक संतों का जीवन केवल जिक्र के लिए नहीं, बल्कि प्रेरणा और आचरण के लिए है। निसंदेह, इन संतों का तप, त्याग और सेवा आज भी लाखों आत्माओं के जीवन में प्रकाश का कार्य कर रहा है। जीवन की विषम परिस्थितियों में भी इन्होंने ब्रह्मज्ञान की मशाल को जलाए रखा और मिशन का संदेश जन-जन तक अपने जीवन के माध्यम से पहुंचाया। वास्तव में, निरंकारी जगत का हर भक्त उनके ऋण से सदैव अभिभूत रहेगा। मुक्ति पर्व की मूल भावना यही है कि जैसे भौतिक स्वतंत्रता हमें राष्ट्र की उन्नति का मार्ग देती है, वैसे ही आत्मिक स्वतंत्रता यानि जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति-मानव जीवन की परम उपलब्धि है।