बाराबंकी. केंद्र की मोदी और यूपी की योगी सरकार आजादी के अमृत महोत्सव के तहत गांव-गांव में लाखों रुपए खर्च कर अमृतसर सरोवरों का निर्माण करवा रही है. दरअसल इस प्रोजेक्ट को प्रदेश सरकार अपने ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल कर चुकी है. इसके तहत तेजी से ग्राम पंचायतों में एक-एक अमृत सरोवर का निर्माण लाखों रुपए खर्च कर किया जा रहा है. हालांकि भ्रष्टाचारियों ने सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में सेंध लगा दी है. बाराबंकी में अमृत सरोवर का निर्माण कराए बिना बिना लाखों रुपये निकालने का मामला सामने आया है. अब सरोवर का निर्माण अधर में लटका पड़ा है.
यह मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जनपद के हरक ब्लॉक क्षेत्र के करौंदी कला गांव का है. यहां सरकार के निर्देश पर गांव में लाखों रुपये की लागत से अमृत सरोवर का निर्माण होना था. ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों ने ग्राम प्रधान के साथ मिलकर अमृत सरोवर के निर्माण के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान करा दिया, लेकिन जमीनी स्तर पर अमृत सरोवर का निर्माण कार्य अधर में लटका पड़ा है. गांव के ग्रामीणों ने इस पूरे मामले को लेकर के हरक के ब्लॉक प्रमुख रवि रावत से शिकायत की. इसके बाद ब्लॉक प्रमुख ने मौके पर पहुंचकर अमृत सरोवर का निरीक्षण किया. इसमें ग्रामीणों के द्वारा लगाए जा रहे आरोप सही पाए गए. दरअसल अमृत सरोवर खुदा पड़ा हुआ है, लेकिन उस पर कोई काम नहीं हुआ. जबकि लगभग चार लाख 75 हजार का भुगतान अमृत सरोवर के नाम पर कर दिया गया. उसका साइन बोर्ड भी अमृत सरोवर पर लगा दिया गया है. ब्लॉक प्रमुख रवि रावत ने बताया कि अमृतसर सरोवरों का निर्माण ढंग से कराया जाए, लेकिन जब मौके पर आकर अमृत सरोवर का हाल देखा गया तो वह काफी बेहाल है. ग्राम प्रधान वसी अहमद ने ब्लॉक के तकनीकी सहायक अरुण वर्मा के साथ मिलकर फर्जी तरीके से बिल तैयार कर लाखों रुपये का भुगतान सरोवर निर्माण के नाम पर करा लिया. वहीं, बाराबंकी की सीडीओ एकता सिंह ने बताया कि अमृत सरोवर के निर्माण में लाखों रुपये के हुए घोटाले को लेकर जांच के आदेश दे दिए हैं. जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.



