जौनपुर। विख्यात सन्त बाबा जयगुरुदेव महाराज के उत्तराधिकारी सन्त पंकज महाराज ने अपनी जनजागरण यात्रा के साथ शिक्षा निकेतन व पानी की टंकी के पास ग्राम जमैथा में पड़ाव डाला। यहाँ सत्संग सभा में प्रवचन करते हुये कहा मानव शरीर की प्राप्ति परमात्मा का सबसे बड़ा बरदान है। इसे पाकर अपना आत्म कल्याण करा लें। इसके लिये शब्द भेदी सन्त सत्गुरु की आवश्यकता है। बिना सन्त महात्मा के कोई जीव भवसागर पार नहीं जा सकता। सन्त, महापुरुश यहां आकर लोगों को समझाते हैं कि मानव जीवन पाकर अपना लोक परलोक दोनों बनायें। सारी आत्मायें शब्द पर जिसे आकाशवाणी, अनहदवाणी, कलमा कहते हैं उस पर उतार कर लाई गईं। बिना उसे पकड़े जीव जन्म मरण के बन्धन से मुक्त नहीं हो सकता। शब्द में चुम्बकीय शक्ति जैसी ताकत है। जब उसे आप साधना और गुरुकृपा से पकड़ेंगे तो ऊपरी मण्डलों में जरा सी देर में पहुंच जायेंगे। जैसे चिड़िया अपने घोसले को छोड़कर आसमान का सफर करती है और वापस घोसले में आ जाती है। षब्द की महिमा बताते हुये कहा ”उल्टा कुआं गगन में, तिसमें जरै चिराग। तिसमें जरै चिराग बिना रोगन, बिन बाती। शाकाहार अपनाना एवं शराब व अन्य नशीले पदार्थों का त्याग समय की मांग है। इसलिये हमारे गुरु महाराज बाबा जयगुरुदेव जी ने आवाज लगाई कि इन्सानों तुम अपने मानव धर्म पर वापस आ जाओ। मनुष्य मन्दिर में बैठ कर भगवान की सच्ची पूजा करो ताकि आप की आत्मा नर्कों-चौरासी में जाने से बच जाय। प्रतिकूल मौसम के बावजूद भी भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
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मानव शरीर की प्राप्ति परमात्मा का सबसे बड़ा वरदान : पंकज महाराज


