- ‘लाखों की सरकारी केबिल बनी सड़क का कूड़ा, बिजली विभाग की रईसी या जनता के टैक्स की बर्बादी? ‘
जौनपुर। एक तरफ प्रदेश सरकार ‘निर्बाध बिजलीÓ और ‘सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर’ के दावे कर रही है, वहीं जौनपुर के मुल्लाटोला और हमाम दरवाजा क्षेत्र में बिजली विभाग की लापरवाही ने विकास के दावों की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। यहाँ बिजली के तार नहीं, बल्कि विभाग की संवेदनहीनता का मकड़जाल बिछा हुआ है।
मुल्लाटोला क्षेत्र में दहशत का आलम यह है कि लोग अपनी ही छतों पर जाने से डर रहे हैं। घरों के ऊपर से गुजर रही 11,000 वोल्ट की हाई-टेंशन केबिल न सिर्फ जर्जर है, बल्कि कई जगह से कटी हुई छत के बिल्कुल ही सटी हुई है। यह कटी हुई केबिल किसी भी वक्त ‘मौत की दावत’ में बदल सकती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि विभाग शायद किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है, ताकि फाइलें खोली जा सकें। क्या अधिकारियों के लिए किसी गरीब की जान की कीमत एक ‘रबड़ की केबिलÓ से भी कम है? वहीं लापरवाही का दूसरा मंजर हाईडिल रोड के ट्यूबवेल चौराहे पर दिखता है। यहाँ पिछले कई महीनों से 11,000 वोल्ट की बेशकीमती केबिल सड़क पर लावारिस पड़ी धूल फाँक रही है। हालांकि इसमें करंट नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि लाखों रुपये की यह सरकारी संपत्ति सड़क पर क्यों सड़ रही है? यह जनता के खून-पसीने के टैक्स से खरीदी गई कीमती केबिल है, जिसे विभाग ने ‘कूड़ा’ समझकर छोड़ दिया है। यह सरकारी धन का खुला दुरुपयोग नहीं तो और क्या है? क्या बिजली विभाग इतना अमीर हो गया है कि उसे लाखों की संपत्ति की सुरक्षा की कोई चिंता नहीं? या फिर यह किसी ‘बड़ी साजिश’ का हिस्सा है कि केबिल चोरी हो जाए और कागजों पर खानापूर्ति कर दी जाए?
हमाम दरवाजा: बच्चों के सिर पर लटकता खतरा

हमाम दरवाजा क्षेत्र की स्थिति और भी भयावह है। यहाँ पोल पर तारों का ऐसा भयानक मकड़जाल है कि दीवार के सहारे लटकते तार जमीन के इतने करीब आ गए हैं कि छोटे बच्चे भी उन्हें आसानी से पकड़ सकते हैं। विभाग की इस ‘कारीगरी’ को देखकर लगता है जैसे उन्होंने बच्चों को ‘मौत से खेलने’ का खुला निमंत्रण दे रखा है।
क्या ‘शॉक’ प्रूफ हो चुका है बिजली विभाग ?

मुल्लाटोला से लेकर हमाम दरवाजा तक, बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। एक तरफ जान का खतरा और दूसरी तरफ सरकारी संपत्ति की बर्बादी—क्या जौनपुर का बिजली विभाग पूरी तरह ‘शॉक’ प्रूफ हो चुका है? जनता अब आश्वासनों की बिजली नहीं, बल्कि धरातल पर समाधान चाहती है।



