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एसएसपी कुँवर अनुपम सिंह ने किया पुलिस कार्यालय का औचक निरीक्षण

जौनपुर। Jaunpur SSP Inspection के तहत जिले की कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुँवर अनुपम सिंह...
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आरा मशीनों तक सुरक्षित पहुंच जाती है हरे पेड़ की लकड़िया

  • सरकार के मंसूबों में पलीता लगा रहे हैं वन माफिया
  • अंधेरी रात में पुलिस दिया तेरे हाथ में

जौनपुर धारा ( शेर बहादुर यादव)

सिकरारा। सरकार द्वारा प्रतिवर्ष लाखों करोड़ों रुपया खर्च करके पर्यावरण को सुरक्षित करने के लिए व पृथ्वी को हरा भरा करने के लिए पौधे लगाए जाते हैं, उनकी देखभाल की जाती है। आवश्यकता पड़ने पर उनकी सिंचाई होती है, लेकिन जब यह पौधे वृक्ष बन जाते हैं तो वन माफियाओं द्वारा वृक्षों को काटकर सरकार के मंसूबों पर पानी फेरने का कार्य करतें है। क्षेत्र के लिये यह कोई नई बात नहीं है वन माफियाओं का यह बहुत पुराना खेल है। लेकिन इस खेल के पीछे संरक्षण किसका है यह भी जग जाहिर है। किसी से छिपा नहीं है। क्योंकि कानून के रक्षक ही भक्षक बन इन माफियाओं के लिये सफलता के द्वारा खोलतें हैं। ये कानून के रखवाले जनता के बीच में पहुंचकर भाषण देते हैं कानून का पाठ पढ़ाते हैं फिर यही लोग कानून को ताख पर रखकर भ्रष्टाचार भी करते रहते हैं। दूसरे लोगों से कानून का पालन करवाने का प्रयास करते हैं और खुद ही कानून का पालन नहीं करते। वन विभाग में जो पुलिस की तैनाती की गई है, वह हरे-भरे पेड़ों को सुरक्षित रखने के लिए की गई है। लेकिन हरे पेड़ों की सुरक्षा करने में वन विभाग भी फेल हो चुका है। इन दिनों क्षेत्र में जिस तरह से हरे पेड़ों की कटाई हो रही है। इससे पर्यावरण का संतुलन दिन प्रतिदिन बिगड़ता जा रहा है। वन माफियाओं द्वारा जंगलों में बगीचों में हरे पेड़ दिन में कटवाए जाते है रात के अंधेरे में ट्रैक्टर व पिकअप पर लाद कर आराम से आरा मशीनों तक पहुंचातें है। आरा मशीनों तक  पहुंचने में इलाकाई पुलिस का बड़ा ही सहयोग होता है। विश्वस सूत्रों की माने तो जो छोटे व्यापारी होते हैं इलाकाई पुलिस को इनको प्रति पेड़ 1000 देना पड़ता है। वहीं पुलिस में हनक और खुद कानून के रखवाले कहलाने वाले बड़े व्यापारी को प्रति टाली 1000 देना पड़ता है। उसके बाद उन्हे इतनी आजादी होती है कि वह चाहे जितने पेड़ काटकर लाद ले जाएं। ऐसे असामाजित कार्यों से प्रतिवर्ष सरकार को करोड़ों का चूना लगाते हुए पृथ्वी के आभूषण को नष्ट कर रहे हैं और पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ने का कार्य कर रहे हैं।ं जब काटी गई हरी लड़कियों को ट्रैक्टर पर लाद कर आरा मशीनों की तरफ चालक रवाना होता है तो इलाकाई पुलिस उनकी देखभाल करने के लिए आगे पीछे लगी रहती है। इसलिए यहां वही कहावत चरितार्थ हो रही है की ‘अंधेरी रात में पुलिस दिया तेरे हाथ में…।Ó शुक्रवार की शाम ग्राम सभा अजोशी में हरा पेड़ काटा जा रहा था। मौके पर कुछ मीडिया कर्मी पहुंच गए और इसकी जानकारी बन दरोगा विद्या शंकर सोनकर को दी, तो उन्होंने कहा कि इसकी कोई जानकारी मुझे नहीं है। अगर हरा पेड़ कट रहा है तो जांच करके कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अधिकारियों का यह बयान पूर्ण रूप से खोखला साबित होता है। क्योंकि वह मीडिया से तो कह देते हैं कि कार्रवाई की जाएगी लेकिन करते कुछ नहीं। क्योंकि उनकी भी जेब गरम की जाती है, वहां पेड़ काट रहे एक व्यक्ति ने मीडिया को बयान दिया की प्रति टाली 1000 इलाकाई पुलिस को देना पड़ता है।

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