मुरादाबादः काम और मजदूरी ना होने का रोना रोने वालों के लिए यूपी के मुरादाबाद का एक गांव उदाहरण है. यहां लगभग 300 परिवार निवास करते हैं. जिनमें अधिकांश किसान और मजदूरपरिवार शामिल है. गर्मी शुरू होते ही करीब 40 परिवार गन्ने के रस का ठेला लगाकर आजीविका चला रहे हैं. इसके साथ ही यह काम 8 से 9 माह तक करते हैं. बाकी दिनों में मजदूरी करते हैं.
गर्मी आते ही आपको शहर के चौराहे व मुख्य स्थानों पर गन्ने के रस का ठेला लगा मिल जाएगा. लेकिन क्या आपको पता है कि नगर में ठेले लगाने वाले अधिकांश लोग कहां से आते हैं. तो चलिए हम आपको बताते हैं कि शहर में करीब 40 रस के ठेले लगाने वाले 12 किलोमीटर दूर बसे फतेहपुर विश्नोई गांव से आते हैं. जहां बिश्नोई, मुस्लिम, सैनी, प्रजापति, कश्यप, समेत अन्य जाति के लोग निवास करते हैं. इनमें किसान मजदूर दुकानदार व अन्य व्यवसाय करने वाले लोग शामिल हैं. अधिकांश परिवार मजदूरी के अलावा अपना काम करना पसंद करते हैं. गर्मी की दस्तक के साथ ही करीब 40 लोग गन्ने के रस का ठेला लगाने सड़क किनारे आ जाते हैं. गांव निवासी राजेश ने बताया कि वह 20 साल से गन्ने के रस का ठेला लगा रहे हैं. वह किसानों से गन्ना खरीद कर लाते हैं उन्होंने बताया कि रोजाना खर्चा पानी लायक पैसा कमा लेते हैं. इसके साथ ही गांव निवासी हरिओम ने बताया कि वह शहर में 10 जगह पर ठेला लगा चुका है. प्रमोद सुनील, मदन समेत अन्य लोगों ने बताया कि इस समय 10 से लेकर 40 तक के गन्ने का रस का गिलास है. किसान से गन्ना साडे 300 रुपए कुंटल से कम ही कम में खरीद लेते हैं.



