- कहीं लटका है पोल, तो कहीं बल्ली के सहारे संचालित हो रही आपूर्ति
- डीएम आवास से कुछ ही दूरी पर खुले में रखा है ट्रांसफार्मर
जौनपुर धारा,जौनपुर। शहर में लगे कई विद्युत ट्रांसफार्मर बेरिकेडिंग विहीन हैं। तमाम पोल गल चुके हैं, तो नगरीय क्षेत्र में कुछ पोल बल्ली के सहारे चल रहें है। यह कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। सोशल मीडिया एवं व्यक्तिगत रूप से शिकायत के बाद भी विद्युत विभाग समस्या का निस्तारण नहीं करा रहा है, अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। शहर में तमाम ऐसे इलाके हैं जहां विद्युत सप्लाई के लिए ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं, जिसमें सुरक्षा की दृष्टि से आबादी वाले क्षेत्र में रखे ट्रांसफार्मर के चारों ओर बेरिकेडिंग की जाती है, लेकिन यहाँ ट्रांसफार्मरों की बेरिकेडिंग तो है ही नहीं, साथ ही जमीन से उंचाई भी नाम मात्र ही है।

बता दें कि करीब तीन लाख की आबादी वाले शहर में लगभग 45हजार बिजली उपभोक्ता हैं। इनको बिजली आपूर्ति के लिए छोटे बड़े 598 से अधिक ट्रांसफॉमर लगाए गए हैं। शहर में कई भीड़भाड़ वाले जगहों पर सड़क के किनारे खुले में प्लेटफार्म पर ट्रांसफार्मर रखा गया है। ट्रांसफार्मरों के चारों ओर लोहे की जाली नहीं लगाई गई है। जिससे इन ट्रांसफार्मर के आस-पास के लोगों में हादसे को लेकर हमेशा भय बना रहता है। राहगीरों को मजबूरी में वहां से गुजरना पड़ता है।

नगर के अतिव्यस्थतम व वीआई क्षेत्र जहाँ डीएम आवास व दीवानी न्यायालय भी है तथा तमाम अधिकारियों का पूरे दिन आना जाना भी लगा रहता है, वहाँ के ट्रांसफार्मर खुले पड़े हैं। कई स्थानों पर विद्युत पोल भी ऐसे हैं जो या तो गल चुके हैं, या फिर झुक गए हैं, या पोल की कमी जाहिर करते हुए बल्ली के सहारे लटक रहें हैं। नगर में लगभग हर गली में विद्युत पोल क्षतिग्रस्त हाल में हैं और नये पोस लगाये जाने के बजाय वेल्डिंग के सहारे चल रहें हैं। खुले ट्रांसफार्मर और विद्युत पोलों से कभी भी बड़े हादसे का अंदेशा बना हुआ है। अभी कुछ दिन पूर्व ही नगर के एआरटीओ कार्यालय मोड़ के पास जर्जर पोल पर रखा ट्रांसफार्म बीच सड़क पर एक गुमटी के ऊपर धड़ाम से गिर गया था। जिससे पूरे क्षेत्र की बिजली मरम्मत से पहले तक गायब थी। जिसे बहाल करने में लगभग दो दिन लग गया था। क्षेत्रीय लोग लगातार शिकायतें करतें रहतें हैं, लेकिन विभाग के अधिकारी लापरवाह अपने लापरवाही की सारी हदों को पार करते हुए घटना की प्रतीक्षा करतें रहतें है। उन पर शिकायतों का कोई असर नहीं हो रहा है। यहां तक कि सोशन मीडिया के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री, विभागीय उच्चाधिकारियों, डीएम को भी जानकारी जाती रहती है, लेकिन निस्तारण के नाम पर सब शून्य ही रहता है। शहर में अधिकांश गलियों में विद्युत पोल पूर्ण रूप से जर्जर हालत में खड़े हैं। इनसे कभी भी हादसा हो सकता है। किसी की जान भी जा सकती है। कुछ इलाकों को अगर छोड़ दे तो पूरा शहर असुरक्षित है। इतना ही नहीं लोग पूरे दिन सडक़ किनारे रखें ट्रांसफार्मरों के आस पास लटक रहे खुले तारों के पास से होकर निकलते रहते हैं, जिससे हर समय हादसा होने का भय भी रहता है। निधि धर्मकांटे के सामने बैंकों के बाहर लगे ट्रांसफार्मर के चारों ओर मोटरसाइकिलों व कारों की पार्किंग लगी रहती है।
मानकों पर नहीं रहता है विभाग का ध्यान

आमजन की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जैसे यदि रोड क्रॉसिंग पर तार है तो गार्डिंग तारों के नीचे जाल हो। ट्रांसफार्मर पर टीपीओ स्विच लगे हो जिससे करंट बंद होता हो। ट्रांसफार्मर बॉडी में अर्थिंग होनी चाहिए, इसके साथ ही ट्रांसफार्मर चबूतरे में लगे हुए हो और चारों ओर जाली लगी हुई होनी चाहिए। यदि एचटी और एलटी एक सपोर्ट पर है तो गार्डिंग अनिवार्य है। न्यूटल अर्थिंग भी होना चाहिए, इससे करंट का खतरा कम होता है। जबकि यह है हकीकत शहर में कुछ जगहों पर छोड़कर कही भी गार्डिंग नहीं है। कई ट्रांसफार्मरों पर टीपीओ स्विच नहीं है। ट्रांसफार्मरों में अर्थिंग नहीं होने से करंट का खतरा बना हुआ रहता है। शहर के डीएम आवास से कुछ ही दूरी पर पर लगा ट्रांसफार्मर इतना नीचे लगा हुए है कि बच्चें आसानी से इसके करंट के शिकार हो सकते हैं। ट्रांसफार्मर के चारों ओर कहीं भी जाली लगी हुई नहीं है।



