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Homeअपना जौनपुररत्ना शुगर मिल संपत्ति जब्त, परिसर पर लगा ईडी का आधिकारिक बोर्ड

रत्ना शुगर मिल संपत्ति जब्त, परिसर पर लगा ईडी का आधिकारिक बोर्ड

जौनपुर। शाहगंज स्थित पूर्वांचल की ऐतिहासिक औद्योगिक इकाई रत्ना शुगर मिल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने कब्जे में ले लिया है। ईडी अधिकारियों ने मिल परिसर में पहुंचकर संपत्ति जब्ती का आधिकारिक बोर्ड लगा दिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत 31 मार्च को जारी आदेश के अनुपालन में की गई है।

ईडी द्वारा लगाए गए बोर्ड में स्पष्ट किया गया है कि अब यह पूरी संपत्ति भारत सरकार के स्वामित्व में है। परिसर में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, खरीद-फरोख्त, हस्तांतरण या नामांतरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

शाहगंज की पहचान और पूर्वांचल की औद्योगिक विरासत मानी जाने वाली रत्ना शुगर मिल का इतिहास काफी पुराना रहा है। वर्ष 1933 में स्थापित यह मिल लंबे समय तक क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रही। जौनपुर, आजमगढ़, सुल्तानपुर और अंबेडकरनगर जिलों के हजारों किसान सड़क और रेल मार्ग के माध्यम से यहां अपना गन्ना लेकर आते थे, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती थी।

हालांकि आर्थिक घाटे के चलते 1986 में मिल का संचालन बंद हो गया था। बाद में 1989 में सरकार ने इसे पुनः संचालित करने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। अंततः 2009 में इस मिल को निजी क्षेत्र को हस्तांतरित कर दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, मिल से जुड़ी यह मूल्यवान संपत्ति बाद में एक पूर्व बसपा एमएलसी के नियंत्रण में चली गई थी। संबंधित व्यक्ति को अदालत द्वारा भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने इस संपत्ति पर कार्रवाई करते हुए जब्ती की प्रक्रिया पूरी की है।

तत्कालीन मजदूर नेता तथा वर्तमान में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रभानंद यादव का कहना है कि बसपा सरकार के दौरान इस मिल को स्क्रैप के मूल्य पर बेच दिया गया था, जबकि उस समय इसका सर्किल रेट लगभग 50 करोड़ रुपये बताया जा रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा ने बाद में इस मिल को सहारनपुर के कारोबारी और पूर्व बसपा एमएलसी हाजी मोहम्मद इकबाल को बेच दिया था।

ईडी की इस कार्रवाई के बाद शाहगंज और आसपास के क्षेत्रों में हलचल तेज हो गई है। कभी हजारों किसानों और श्रमिकों की आजीविका का आधार रही यह मिल अब एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई के कारण सुर्खियों में है। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है और आवश्यकतानुसार आगे भी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

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