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संघ का वर्ष प्रतिपदा उत्सव व पथ संचलन आयोजित

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“जौनपुर में कानून तोड़ती खाकी! बिना हेलमेट घूमते पुलिसकर्मी, ‘नो हेलमेट-नो फ्यूल’ अभियान फेल”

  • ‘नो हेलमेट-नो फ्यूल’ का निकला दम: क्या नियम सिर्फ जनता की जेब काटने के लिए हैं?
  • नंबर प्लेट गायब, वर्दी का रौब कायम: क्या जौनपुर पुलिस खुद को कानून से ऊपर मानती है?

जौनपुर। जौनपुर जनपद में कानून व्यवस्था को लागू करने वाली पुलिस खुद ही नियमों को ठेंगा दिखा रही है। सड़कों पर सरेआम बिना हेलमेट और बिना मानक वाली नंबर प्लेटों के साथ घूमते पुलिसकर्मी न केवल यातायात नियमों का मखौल उड़ा रहे हैं, बल्कि आम जनता के बीच प्रशासन की छवि को भी धूमिल कर रहे हैं। जबकि आम आदमी पर नियमों का डंडा चलाने में यही पुलिस सबसे आगे रहती है।

जौनपुर की सड़कों, विशेषकर कलेक्टर कचहरी, अटाला मस्जिद मार्ग और वाजिदपुर तिराहे जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अक्सर ऐसी पुलिस गाड़ियाँ देखी जा सकती हैं जिन पर नंबर प्लेट भारत सरकार के मानक के अनुरूप नहीं हैं। कई वाहनों पर तो नंबर की जगह केवल ‘पुलिसÓ लिखकर छोड़ दिया गया है। इतना ही नहीं, बिना हेलमेट बाइक चलाते पुलिसकर्मी अब शहर का एक आम दृश्य बन चुके हैं। जौनपुर पुलिस द्वारा चलाए जाने वाले विशेष अभियानों में फरवरी 2026 के दौरान ही 25,560 से अधिक वाहनों पर कार्रवाई की गई, लेकिन इस कार्रवाई की जद में विभाग के अपने कर्मचारी कभी नहीं आते। जौनपुर की जनता पूछ रही है कि क्या कानून की व्याख्या वर्दी के हिसाब से बदल जाती है? यदि नियम रक्षकों पर लागू नहीं होते, तो वे जनता से इसके पालन की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। समय आ गया है कि वरिष्ठ अधिकारी खुद मिसाल पेश करें ताकि खाकी का सम्मान बना रहे।

ठंडे बस्ते में ‘नो हेलमेट नो फ्यूल’ अभियान; आम जनता पर डंडा और खुद को ‘नो चालान’ की छूट

जौनपुर जिला प्रशासन ने बड़े शोर-शराबे के साथ ‘नो हेलमेट नो फ्यूलÓ अभियान की शुरुआत की थी, जिसके तहत पेट्रोल पंपों को निर्देश दिए गए थे कि बिना हेलमेट किसी को तेल न दिया जाए। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह अभियान अब पूरी तरह ठंडा पड़ चुका है। शहर और ग्रामीण इलाकों के पेट्रोल पंपों पर नियमों की सरेआम अनदेखी हो रही है।

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