- सहकारी पीजी कॉलेज मिहरावा में विद्वानों का लगा जमघट
- देश के कोने-कोने से आए विद्वत जनों, शोध छात्रों ने शोध पत्र पढ़ा
जौनपुर धारा, जौनपुर। सहकारी पीजी कॉलेज मिहरावा में भूगोल विभाग के तत्वाधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन हुआ। महाविद्यालय के प्रबंधक राजीव कुमार सिंह ने कहा कि नगरीकरण की प्रक्रिया का समाज अर्थव्यवस्था एवं पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है। इसके बावजूद भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में नगरीकरण की भूमिका को झूठलाया नहीं जा सकता।समकालीन मुद्दों और चुनौतियों का समाधान करने के लिए विचार विमर्श की आवश्यकता है। महाविद्यालय इस तरह की गतिविधियों को संचालित करने के लिए इस दिशा में शोध को बढ़ावा देने समाज और राष्ट्र के विकास में सकारात्मक भूमिका निभाने का जोर दिया। सेमिनार को सम्बोधित करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो.दुर्गेश त्रिपाठी ने कहा कि भारत को विकसित राज्य बनाने में नगरीकरण की भूमिका महत्वपूर्ण है नगरीकरण के साथ ही इससे उपजी चुनौतियों से निपटने की जरूरत है। नगरीकरण से भारत के सामाजिक आर्थिक व सांस्कृतिक परिवेश में परिवर्तन आएगा। विकसित भारत के लिए स्मार्ट सिटी मिशन और डिजिटल इण्डिया जैसी सरकारी योजनाओं को क्रियान्वित करने की जरूरत है। विकसित भारत में टिकाऊ, समावेशी और जिम्मेदार नगरीकरण के लिए सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है। महाविद्यालय के अध्यक्ष डॉ.प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत का सपना देखा है, उसकी प्राथमिकताएं तय की है उस दिशा में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे सामने नगरीकरण की समस्याएं मौजूद हैं। प्रो.अंजू सिंह ने कहा कि नगरीकरण के लिए सामुदायिक भागीदारी की जरूरत है। नागरिक, संस्थाओं और सरकार की साझेदारी का महत्व बढ़ गया है। प्रो.रमेश शर्मा ने कहा कि विकसित भारत के सपनों को साकार करने में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। हम सब मिलकर न केवल नगरीकरण के मुद्दों को हल कर सकते हैं। उक्त अवसर पर राजकालेज के प्राचार्य प्रो शंभूराम ने भी अपने विचारों को व्यक्त किया। अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ.अरविन्द कुमार सिंह ने कहा कि हमारा प्रयास ही सही दिशा को तय करता है। लेफ्टिनेंट डॉ.रणधीर कुमार ने नेशनल कैडेट कोर के कैडेट के मार्च किया। इस अवसर पर डॉ.सुधीर कुमार पांडे, डॉ.गोपाल नंदन श्रीवास्तव, दिग्विजय सिंह, डॉ.रेनू सिंह, डॉ.मनोज सिंह, डॉ.शैलेंद्र शुक्ला, डॉ.परमानंद पांडे, डॉ.सुरेंद्र सिंह, डॉ.सत्यम मिश्रा, डॉ.पूजा सिंह, डॉ.मोहम्मद आफताब आलम, डॉ.योगेंद्र प्रताप सिंह, डॉ.मनोज सोनकर, डॉ.शैलेश कुमार सिंह, डॉ.अर्जुन यादव, डॉ.शिव प्रताप सिंह, डॉ.नीरज सिंह, डॉ.नितेश कुमार यादव, डॉ.राघवेंद्र, डॉ.विकास सिंह, डॉ.रविकांत सिंह, डॉ.सूरज गुप्ता, डॉ.तारकेश्वर सिंह, डॉ.विवेक सिंह, योगेश सिंह, पवन श्रीवास्तव, राजन सिंह, कमलेश यादव, अनिल यादव, रोहित शर्मा, नितेश पाण्डे, जयशंकर प्रजापति, प्रवीण मौर्य, डॉ.रेशमा, डॉ.हरिकेश विश्वकर्मा सहित विद्वानों शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र का वाचन किया।



