- ‘मौत का सौदागर’ बना स्वास्थ्य तंत्र
जौनपुर। ‘मरीज की साँसें चलें या न चलें, अस्पताल का बिल मीटर चलता रहना चाहिए ‘यह कड़वा सच आज स्वास्थ्य तंत्र की पहचान बन चुका है। जनपद के सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर जो ‘मौत का खेल’ खेला जा रहा है, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है।
सरकारी दावों की पोल खोलता सरकारी अस्पताल भ्रष्टाचार का केंद्र बना हुआ है। यहाँ का खेल बड़ा शातिर है। दिन भर तो कुछ जांचें अस्पताल की लैब में होती हैं, लेकिन जैसे ही शाम होती है, डॉक्टरों उन्ही जांचों को दोबारा लिख दी जाती हैं जो अस्पताल की लैब बंद होने के कारण बाहर से करानी पड़ें। निजी अस्पतालों की हकीकत और भी डरावनी है। यहाँ ‘इलाज’ के नाम पर डकैती डाली जा रही है। कई निजी अस्पतालों पर आरोप है कि मरीज की मौत हो जाने के बाद भी उसे ‘सीरियस’ बताकर घंटों आईसीयू या वेंटिलेटर पर रखा जाता है। यह खेल तब तक चलता है जब तक परिजन अपनी जमीन-जेवर बेचकर बिल न भर दें।
वेंटिलेटर का छलावा: हाल ही में नईगंज और लाइनबाजार क्षेत्र के अस्पतालों से ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ मरीज की मौत हो जाने के बाद भी उसे ‘सीरियस’ बताकर आईसीयू में रखा गया। परिजनों का आरोप है कि जब तक उनकी जेब खाली नहीं हो गई, अस्पताल ने लाश नहीं सौंपी।
सिजेरियन की ‘फैक्ट्री’ : प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को डरा-धमकाकर बेवजह बड़ा ऑपरेशन करना यहाँ का सबसे आम और सफल बिज़नेस मॉडल बन चुका है। जिले में नॉर्मल डिलीवरी अब अपवाद बनकर रह गई है।
बदसलूकी और दहशत: यदि परिजन बिल पर सवाल उठाएं, तो अस्पताल का स्टाफ और बाउंसर मारपीट और बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं। हाल ही में शाहगंज के एक अस्पताल में ऑपरेशन के बाद महिला की मौत पर जमकर हंगामा हुआ था।
‘अंधेरा होते ही शुरू होता है कमीशन का धंधा’
सरकारी अस्पताल जहाँ गरीबों के मुफ्त इलाज का दावा करते हैं, वहां की हकीकत कुछ और ही है। जिला महिला अस्पताल भ्रष्टाचार का नया अड्डा बन चुका है।
बाहरी जांच का दबाव: दिन में सरकारी लैब चालू रहती है, लेकिन शाम होते ही ऐसी जटिल जांचें लिख देते हैं जो केवल बाहर के प्राइवेट सेंटरों पर होती है, और जो जांच अन्दर हो सकती है वो लैब बन्द होने के कारण नहीं हो पाती है। डॉक्टरों का निजी लैब संचालकों के साथ फिक्स्ड कमीशन का खेल सीधे तौर पर मरीजों की जेब काट रहा है।
उपेक्षा और भेदभाव: यहाँ इलाज में लापरवाही और मरीजों के साथ धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव के आरोप भी लगते रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल? उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में प्रदेश भर में नियमों का उल्लंघन करने वाले 178 निजी अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए हैं और 281 पर स्नढ्ढक्र दर्ज की है। लेकिन जौनपुर में अभी भी कई ‘मानक विहीनÓ अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिससे जिला स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। Read more



