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Jaunpur Dhara News :  विधानसभा चर्चा में विधायक ने उठाया ग्रामीण इलाकों के विकास का मुद्दा

जौनपुर धारा,मुंगराबादशाहपुर। विधानसभा क्षेत्र के विधायक पंकज पटेल ने विधानसभा सत्र में सदन के समक्ष ग्रामसभाओं के विकास पर चर्चा करते हुए क्षेत्रों के विकास की बात पर चर्चा किया। विधायक ने सदन में सवाल किया कि आज साठ प्रतिशत से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग हमारे अन्नदाता हैं। जब उनके विकास की बात आती है तो तब उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि उनके लिए जो बजट दिया जाता है उनके विकास या क्षेत्र के विकास के लिए उनमें भी विभिन्न प्रकार की कटौतियां कर दी जाती है। प्रत्येक ग्रामसभा का जो प्रधान है वो विकास कैसे करें। जो ग्रामसभा में मानदेय दिया जाता है ग्राम प्रधानों का मानदेय ग्राम पंचायत सहायक का मानदेय, समुदायिक शौचालय के केयर टेकर का मानदेय गौशाला केयर टेकर का मानदेय पंचायत भवनों का विद्युत बिल व विद्यालय के विद्युत बिल का प्रकाश व्यवस्था हेतु स्ट्रीट लाइट का बिल और चुनाव खर्च के लिए भी ये सारी जो मानदेय होते हैं। ये ग्राम प्रधानों के निधि से कटता है। यदि ये सभी खर्च जोड़ा जाएं तो 2लाख पैंसठ हजार रुपए विद्युत बिल छोड़ कर खर्च हो जाता है। जो बजट जाता है उसमें से 2लाख पैंसठ हजार रूपए मानदेय में खर्च हो जाता है। आज एक छोटी सी ग्रामसभा ले ली जाए तो उसका 25 से 30हजार रुपए महिने का खर्च आता है। एक साल का साढ़े तीन से चार लाख रुपए आता है। एक छोटी सी ग्रामसभा में केंद्रीय वित्त व राज्य वित्त का जो एक वर्ष का बजट है वो 8 लाख छप्पन हजार रुपए है, अगर मंथली का जो खर्च है उसको जोड़ दिया जाए तो एक छोटी ग्रामसभा के प्रधान को विकास के लिए मात्र चार से पांच लाख रुपए सालाना मिलते हैं। जब 5लाख रुपए ग्रामसभा के प्रधानों को मिलता है तो ग्रामसभा का विकास कैसे हो सकता है। सदन में विधायक पंकज पटेल ने मंत्री से प्रश्न कर जानना चाहा कि क्या सरकार ग्रामसभा में दिए जाने वाले मानदेय को अलग से बजट देने पर विचार करेंगी, तथा दूसरे प्रश्न में पूछा कि क्या सरकार छोटी ग्रामसभाओं में जिनका विकास नहीं हो पा रहा है। उनके बजट को बढ़ाने पर विचार करेंगी। हां तो कब तक नहीं तो क्यों..? उक्त प्रश्नों के जबाब में पंचायती राज्यमंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि इस पर हम लोगों ने अधिकारियों संग बैठक की 1266 ऐसी ग्राम पंचायते है जिनके यहां चार से पांच लाख के आसपास जाता है। उनके बजट को बढ़ाने के लिए चर्चा कर रहे हैं। हम आपको आश्वस्त करते हैं कि आपकी भावनाओं की कद्र की जाएगी।

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