जौनपुर धारा, खुटहन। स्थानीय तहसील मुख्यालय या दिवानी कचहरी में तो पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए एडवोकेट आसानी से उपलब्ध मिल जाते हैं। लेकिन थाना गेट के पास या बैंक परिसर में अक्सर गांव के कम पढ़े लिखे सीधे-साधे लोग तहरीर या धन निकासी व जमा फार्म भरवाने के लिए अपरिचितों तक से मदद ले लिया करते हैं। यहां कोई वकील नहीं होता। लोग मानवता वस उनकी मदद कर दिया करते हैं। इसके उलट स्थानीय थाने में पीड़ित के दुख दर्द को शिकायती पत्र के माध्यम से लिपिबद्ध करने वाले को ही मुकदमे में सामिल कर दिया जा रहा है। जिसके पीछे महज यह कारण है कि तहरीर पुलिस के मन माफिक नहीं लिखी गई। मामला उसरौली गांव का है। जहां दलित अखिलेश को गांव के ही कुछ मनबढ़ो ने पुरानी रंजिश को लेकर मारपीट कर घायल कर दिया। पीड़ित न्याय की गुहार लेकर थाने पहुंचा तो उसे तहरीर देने को कहा गया। वह बाहर किताब कापी की दुकान के संचालक संतोष शर्मा के पास आकर प्रार्थना पत्र लिखने का आग्रह किया। उन्होंने उसकी पीड़ा को शब्दों के माध्यम से तहरीर में लिख दिया। आरोप है कि पहले तो पुलिस ने तहरीर बदलवाने को कहा। संतोष शर्मा का आरोप है कि उन्होंने इन्कार कर दिया तो मुकदमे में लेखक दिखाकर उनका नाम भी शामिल कर दिया गया। इस संबंध में थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह ने बताया कि लेखक का नाम मुकदमे में नहीं होना चाहिए। इसको लेकर मुंशी व अन्य जिम्मेदारों से बात की जा रही है।
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Jaunpur Dhara News : पुलिस ने तहरीर लेखक को भी मुकदमे में कर दिया शामिल



