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53 की उम्र में तोड़ा दम, करियर के पीक पर थे सिंगर मुकेश

एक ऐसी आवाज, जिसने हर दिल को छुआ. वो सिर्फ एक आवाज नहीं थी, बल्कि जादू थी, जो अपनी ओर लोगों को खींचे चली आती थी. उनके गाने आज भी सदाबहार हैं. हिंदी सिनेमा को जिसने अपनी अद्भुत आवाज में कई गाने दिए, वह कोई और नहीं, बल्कि मुकेश हैं. आज वह हमारे बीच नहीं हैं, पर इनके गुनगुनाए गीतों को हर दिल याद करता है. यूं तो मुकेश ने अपने जमाने के सभी लीड एक्टर्स के लिए गाने गाए, पर सबसे ज्यादा उन्होंने शोमैन राज कपूर के लिए गाए हैं. इनमें ‘दोस्त-दोस्त ना रहा’, ‘जीना यहां मरना यहां’, ‘सजन रे झूठ मत बोलो’, ‘कहता है जोकर’, ‘दुनिया बनाने वाले’, ‘आवारा हूं’ और ‘मेरा जूता है जापानी’ सहित अनेक गाने शामिल हैं.

दिल्ली में जन्मे मुकेश का पूरा नाम मुकेश चांद माथुर था. फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर गायक थे. पर वह सिंगर नहीं, एक फिल्मी हीरो बनना चाहते थे. हालांकि, मुकेश ने कुछ फिल्में की भीं, पर नाकामयाब रहे. साल 1942 में फिल्म ‘निर्दोष’, साल 1953 में ‘माशुका’ और साल 1956 में इन्होंने ‘अनुराग’ फिल्म की. तीनों ही फ्लॉप साबित हुईं. इसके बाद मुकेश ने कभी एक्टिंग की ओर रुख नहीं किया. फिल्म ‘पहली नजर’ में ‘दिल जलता है तो जलने दे’ गाना गाया. यह सुपरहिट हुआ. इस गाने को मुकेश ने केएल सहगल के अंदाज में गाया था. साल 1949 मुकेश की जिंदगी में टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ. महबूब खान की फिल्म ‘अंदाज’ और राज कपूर की ‘बरसात’ में इन्होंने जो गाने गाए, सभी सुपरहिट हुए. मुकेश के 6 गाने ऐसे भी रहे जो रेडियो शो पर टॉप रैंक पर रहे, वह भी पूरे साल. साल 1974 में मुकेश को नेशनल अवॉर्ड मिला. ‘कई बार यूं ही देखा है, ये जो मन की सीमा रेखा है’ सॉन्ग के लिए इन्हें इस अवॉर्ड से नवाजा गया. फिल्म ‘रजनीगंधा’ का यह गाना था, जिसे सलिल चौधरी ने कंपोज किया था. इंडिया के मैच विनिंग लेग स्पिनर बीएस चंद्रशेखर, मुकेश के बहुत बड़े फैन थे. मुकेश यूएसए टूर पर थे जब उनका निधन हुआ. 53 साल के मुकेश की हार्ट अटैक से मौत हुई थी. तब सिंगर करियर में पीक पर थे. पर चंद मिनटों में सबकुछ खत्म हो गया.