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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की जिला स्तरीय समिति की बैठक संपन्न

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Homeउत्तर प्रदेशहोली उत्सव को लेकर तैयार हो रहे है रंग बिरंगे गुलाल

होली उत्सव को लेकर तैयार हो रहे है रंग बिरंगे गुलाल

मुरादाबाद. मुरादाबाद में होली उत्सव को पर्यावरण हितैषी बनाने का ताना-बाना बुना जा रहा है. रंग बिरंगे गुलाल तैयार हो रहा है. जबकि होलिका दहन को इको फ्रेंडली बनाने की तैयारी भी तेज हो गई है.गोबर की लकड़ी तैयार कराई जा रही है. गाय के गोबर के ऊपर कपूर, सुगंध, चंदन और फूलों की खुशबू भरी जा रही है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि जिससे पेड़ों का कटान रोका जा सके और गो संरक्षण हो. महानगर और नगरों में इको फ्रेंडली होली की तैयारी शुरू हो गई है.

शहर के गौशालाओं में यह तैयारी चल रही है, तो वहीं मनोहरपुर स्थित कृषि प्रशिक्षण केंद्र में आरारोट का  गुलाल तैयार किया जा रहा है. इसमें गुलाब के फूल जयंती की पंखुड़ियां दालचीनी के पत्ते और नीले रंग के गुलाल के लिए अपराजिता के फूलों का इस्तेमाल हो रहा है. अबकी गेरुआ रंग यानी कि सिंदूरी रंग का गुलाल तैयार हो रहा है. इस रंग और ब्रांड के लिए सिंदूर के पत्ते और बीज का प्रयोग किया जा रहा है. मनोहर पर केंद्र से जुड़े प्रशिक्षु इस तरह के गिफ्ट हैंपर बना रहे हैं. जबकि गोबर से उपला तैयार कराया जा रहा है. तो वही मशीन से लकड़ी के सांचे में डाले जा रहे हैं. यह लकड़ी चंदन, कपूर और विभिन्न तरह की जड़ी बूटियों से मिश्रित होगी. निर्माण में जुड़े लोग बताते हैं कि एक होलिका दहन में एक हजार की लकड़ी की जरूरत होगी. जबकि उपला 600 से 700 रुपए में मिल जाएगा. उपले के लिए पड़ोसी जनपद रामपुर अलीगढ़ मेरठ के लोगों ने मांग की है. केंद्र के प्रशिक्षक गोबर से मीथेन गैस निकालकर गो कास्ट तैयार कर रहे हैं. जिससे पर्यावरण को किसी तरह का खतरा ना हो. मनोहरपुर स्थित कृषि प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक डॉ. दीपक मेंदीरत्ता ने बताया कि हमारे केंद्र ने इस साल भी प्राकृतिकहोलिका दहन के लिए गोबर के कंडे बनाने का लक्ष्य तय कर लिया है. गुलाल गेंदा अपराजिता सिंदूर के पत्ते और दालचीनी की पत्तियों की मदद से गुलाल बनाया जा रहा है. शहर के अलावा आसपास के जिलों से गोबर के कंडे की मांग है. पिछले साल 40 क्विंटल गो कार्ट तैयार हुए थे. इस साल 140 की मांग है हम पांच रंग गुलाल तैयार कर रहे हैं. यह सेहत के लिए अच्छा रहेगा रंग और गंध को लेकर विशेष प्रयास कर रहे हैं.

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