जौनपुर धारा, जौनपुर। निरंकार को हर कार्य में सम्मिलित कर आध्यात्मिक जागृति और सच्ची खुशी का विस्तार संभव है। यह प्रेरणादायक वचन निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज द्वारा नववर्ष के शुभ अवसर पर दिल्ली में आयोजित विशेष सत्संग समारोह में मानवता के नाम संदेश दिए। सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज के पावन संदेशों को बताते हुए स्थानीय मीडिया सहायक उदय नारायण जायसवाल ने बताया कि नववर्ष केवल 2024 से 2025 का नम्बर परिवर्तन है। वास्तविकता में यह केवल इंसानी मस्तिष्क की बनाई गई अवधारणा है। सच्ची खुशी और आनंद केवल निरंकार में समाहित है। इस नये वर्ष में हमें अपने जीवन को ऐसा बनाना है कि हम हर व्यक्ति तक इस सच्चाई को पहुंचा सकें। हमें अपने जीवन को इस तरह ढालना है कि हर पल, हर कार्य में निरंकार की महत्ता को समझ सकें। सेवा, सुमिरण और संगत का वास्तविक अर्थ तभी प्रकट होगा, जब हम इसे दिल से अपनाएंगे। केवल मित्रता या सामाजिक दबाव के कारण अपनी आध्यात्मिकता में परिवर्तन नहीं करना चाहिए। अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए, हर कार्य में निरंकार को समाहित करना जरूरी है। यही वह मार्ग है, जो हमारे जीवन में आध्यात्मिक जागरूकता और संतोष का विस्तार करता है। इस नये वर्ष में हमें अपने पुराने अनुभवों से सीख लेकर, अपने भीतर की कमियों को सुधारते हुए, अच्छाइयों को अपनाना चाहिए। सतगुरु माता से पूर्व आदरणीय राजपिता ने सभी संतों को सम्बोधित करते हुए फरमाया कि आज के समय में समाज और मानव जीवन से परमात्मा की उड़ीक धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। लोग परमात्मा के अस्तित्व पर संदेह कर रहे हैं और सत्य की राह देखने के बजाय उसे नकारने में लगे हैं। यह स्थिति केवल इसलिए है क्योंकि कई लोग परमात्मा को पाने का दावा करते हैं, लेकिन सच्चे प्रयास नहीं करते। सतगुरु के ज्ञान से हमें जो सत्य प्राप्त हुआ है, वह केवल कहने-सुनने तक सीमित न रहे। यह हमारे जीवन में महसूस हो और ऐसा महके कि समाज के लिए वरदान बन सके।
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हर कार्य में सम्मिलित कर आध्यात्मिक जागृति और सच्ची खुशी का विस्तार संभव

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