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एसएसपी कुँवर अनुपम सिंह ने किया पुलिस कार्यालय का औचक निरीक्षण

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सभी को सहकारिता के क्षेत्र में आगे आने की जरूरत : मुरली पाल

  • 45वें स्थापना दिवस पर सम्मान समारोह का आयोजन

जौनपुर धारा, जौनपुर। सहकार भारती जौनपुर के तत्वाधान में रविवार को 45वें स्थापना दिवस के अवसर पर सम्मान समारोह का कार्यक्रम जिलाध्यक्ष कुंवर प्रदीप सिंह रिंकू की अध्यक्षता मे आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि मुरली पाल प्रांत कार्यवाह काशी प्रांत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विशिष्ट अतिथि डॉ. अरुण कुमार सिंह प्रदेश संगठन प्रमुख सहकार भारती उत्तर प्रदेश एवं मंचासीन अतिथियों द्वारा सहकार भारती के संस्थापक श्रद्धेय लक्ष्मण राव इनामदार व भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते मुख्य अतिथि श्री पाल ने कहा कि समाज के सभी लोगों को सहकारिता के क्षेत्र में आगे आने की जरूरत है। जो कार्य आज सहकार भारती कर रही है, वह काफी महत्वपूर्ण है। हमें सभी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए सहकारिता को संस्कार आधारित करना ही होगा। पारिवारिक भावना का विस्तार करते हुए पूरा समाज अपना परिवार है, इस भावना से कार्य करना होगा यही सहकारिता है। हमें सहकारी शब्द को पुन: स्थापित करना है इस संकल्प को लेकर चलना होगा। सहकार का कार्य समर्पण भाव से करना है। निरंतर करना है, इस भाव से चलते रहना है। कार्य की पहचान बनानी है। सहकारिता का कार्य अकेले नहीं हो सकता, इस कार्य को मिलजुल कर परस्पर सहयोग से करना है। सहकार भारती की यह विशेषता है कि हम कार्य को अकेले नहीं समूह में करते हैं और समूह तभी स्वस्थ होता है जब उसमें परस्पर विश्वास होता है। विशिष्ट अतिथि डा. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि सहकारिता अपने उद्देश्य से भटक रही है, सहकारी संस्थाओं में गिरावट आ रही है जिसके कारण लक्ष्य की परती सम्भव नहीं हो सकता है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए सहकारी क्षेत्र मे शुद्धि, बुद्धि और स्मृद्धि लाने के लिये स्वर्गीय लक्ष्मण राव ईनामदार ने सहकार भारती की स्थापना 11 जनवरी 1979 को की। कार्यक्रम मे स्वागत उद्बोधन जिला संगठन प्रमुख विवेक सिंह ने किया। जनपद के सहकारिता क्षेत्र के मर्मज्ञ राम समुझ जो कई बार जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन रहे। उन्होंने भी कार्यक्रम में अपने संबोधन में सहकारी समितियों में वर्तमान में आई गिरावट की ओर इंगित करते हुए आवाहन किया की सहकारिता आम जन की सहभागिता से संचालित होनी चाहिए इसमें राजनैतिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। सुभाष सिंह प्रधानाचार्य ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सुरेन्द्र जायसवाल ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से अनन्त कुमार मिश्र, विश्वनाथ दूबे, डा. सत्यदेव सिंह, प्रीति गुप्ता अन्त में राष्ट्रगान के बाद कार्यक्रम के समाप्ति की घोषणा की गई।

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