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Homeअपना जौनपुररविदासिया धर्म का ध्वजारोहण कर रैदासियों ने मनाया जश्न

रविदासिया धर्म का ध्वजारोहण कर रैदासियों ने मनाया जश्न

वाराणसी। संत शिरोमणि गुरु रविदास की 649वीं जयंती समारोह के अवसर पर, सुबह संत मनदीप दास द्वारा नगवां स्थित रविदास पार्क में संत रविदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद, मंदिर परिसर में बने रविदासिया धर्म के 120 फीट ऊंचे हरि निशान का ध्वजारोहण किया गया। इस दौरान, श्रद्धालुओं ने मंदिर और आसपास की छतों पर चढ़कर पुष्पवर्षा की और जश्न मनाते हुए सभी का अभिनंदन किया। पूरा इलाका ‘रविदास शक्ति अमर रहे, ‘जय गुरुदेव, ‘धन गुरुदेवÓ के नारों से गूंजता रहा, और भक्त झूमते-गाते रहे। मंदिर में चल रहे रविदास अमृतवाणी पाठ का भोग लगाकर समापन किया गया। इसके बाद, संत रविदास की आरती उतारी गई और मंदिर में दर्शन-पूजन का क्रम जारी रहा। देर रात से ही दर्शन के लिए महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग लाइन लगी रही। संत रविदास के जन्मस्थान पर बने पार्क के मुख्य पंडाल में संतों का प्रवचन और भजन कीर्तन चलता रहा। मंच पर संत मनदीप दास ने संचालन किया, जबकि ट्रस्टी निरंजन चीमा और के एल सरोवा ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर पंजाब के कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत भी मंच पर अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। इस समारोह में रैदासियों ने एकजुटता और श्रद्धा का अद्भुत प्रदर्शन किया। ध्वजारोहण के समय भक्तों ने एक-दूसरे को बधाई दी और संत रविदास के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस अवसर पर आयोजित भजन कीर्तन ने सभी को भावविभोर कर दिया। संत रविदास के विचारों और शिक्षाओं को फैलाने का यह एक महत्वपूर्ण अवसर था, जिसमें सभी ने मिलकर भाग लिया। समारोह के अंत में, सभी भक्तों ने संत रविदास की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। इस प्रकार, यह जयंती समारोह न केवल श्रद्धा का प्रतीक था, बल्कि रैदासिया धर्म के अनुयायियों के लिए एकजुटता और सामूहिकता का भी संदेश लेकर आया। संत रविदास की जयंती पर आयोजित यह समारोह न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक था, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का भी संदेश देने वाला था। रैदासियों ने इस दिन को विशेष रूप से यादगार बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया।

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