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Homeअपना जौनपुरमासिक तरही नशिस्त का हुआ आयोजन

मासिक तरही नशिस्त का हुआ आयोजन

जौनपुर धारा, जौनपुर। बज्म ए शीराज के तत्वावधान में रविवार की शाम में एक तरही नशिस्त का आयोजन नगर के मोहल्ला शेख मुहामिद में स्थित अनवार मंजिल में किया गया जिसकी अध्यक्षता शायर नादिम जौनपुरी एवं संचालन की जिम्मेदारी मजहर आसिफ ने अंजाम दिया। मुख्य अतिथि के रूप में सांसद श्याम सिंह यादव एवं विशिष्ट अतिथि के तौर पर बसपा नेता सलीम खान उपस्थित रहे। प्रोग्राम की शुरूआत यासिर हस्सान ने तिलावत ए कुरआन से किया व नात ए नबी हनीफ अंसारी ने पेश किया। मिसरा ए तरह ‘काँटो को भी गुलाब समझने लगे हैं लोग’ बज्म ए शीराज के अध्यक्ष शायर अहमद निसार जौनपुरी ने एक माह पूर्व दिया था जिस पर समस्त शायरों एवं कवियों ने तबअ आजमाई करके अपनी अपनी रचनाओं को श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया जिससे श्रोता मंत्रमुग्ध हो गये और पूरा हाल वाह वाह के स्वर से गूँज उठा। मुख्य अतिथि सांसद श्याम सिंह यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि शेर व शायरी लोगों के दिलों को जोड़ने का और अपनी बात सलीके से कहने का एक माध्यम है। आज इस नशिस्त का हिस्सा बनके स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। समस्त कवियों की रचनाएँ एक से बढ़कर एक थीं आने वाले महीने में मैं अपने निवास पर एक नशिस्त का आयोजन करूँगा जिसमें समस्त कवि व शायर उपस्थित रहेंगे। इस मौके पर अहमद निसार जौनपुरी ने कहा- इससे ज्यादा मेरी पेजीरायी होगी क्या, मुझको मेरा जवाब समझने लगे हैं लोग। मजहर आसिफ ने कहा- जिल्लत के जिसने खोल दिए राब्ते कई, इज्जत का उसको बाब समझने लगे हैं लोग। अहमद अजीज गाजीपुरी ने कहा- कुछ देर शम्स अब्र की क्या जद मे आ गया, जुगनू को आफताब  समझने  लगे हैं लोग। अकरम जौनपुरी ने कहा- उस जान ए गु़फ्तगू से हुई जबसे गु़फ्तगू, खुशबू का हर खेताब समझने लगे हैं लोग। अनवारुल हक अनवार, अनवार तुमको शेअर व अदब के जहान में, खुर्शीद व माहताब समझने लगे हैं लोग। अनवार अहमद कासमी- जबसे हैं गुल की चाक कबायें निगाह में, कलियों का इजतीराब समझने लगे हैं लोग। कारी जिया जौनपुरी ने कहाकि – आये हुए हैं लोग अयादत के वास्ते, मेरा भी इजतीराब समझने लगे हैं लोग। मोनिस जौनपुरी ने कहाकि- अपनी जबान खोलें मगर एहतियात से, थोड़े को बेहिसाब समझने लगे हैं लोग। अहमद हफीज जौनपुरी का कहना था- है कहत मोतियों का दयार ए जमाल में, दरिया का सतह ए आब समझने लगे हैं लोग। शजर जौनपुरी ने कहाकि- ये जिंदगी जो नेअमत ए परवरदिगार है, फिर क्यों उसे अजाब समझने लगे हैं लोग। अन्य शायरों में नादिम जौनपुरी, वसीम जौनपुरी, आरपी सोनकर, जीशान जौनपुरी, शोहरत जौनपुरी, वहदत जौनपुरी, शहजाद जौनपुरी, अमृत प्रकाश जौनपुरी, आशिक जौनपुरी, नातिक गाजीपुरी, हसन फतेहपुरी, हिजाब जौनपुरी ने भी अपनी अपनी रचनायें प्रस्तुत किया। अंत में बज्म ए शीराज के सेक्रेटरी हनीफ अंसारी ने सभी का शुक्रिया अदा किया। इस अवसर पर जफर मसूद, अनवारुल हक गुड्डु, इरशाद खान, साजिद अनवार, माजिद अनवार, हामिद अनवार, महंत भारद्वाज आदि उपस्थित रहे।

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