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बदहाली का शिकार हो रही आदमपुर सीएचसी, डॉक्टरों के बिना दम तोड़ती स्वास्थ्य सेवाएं

  • वार्ड बॉय से हो रही सफाई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा
  • सरकारी वादों की पोल खोलती जर्जर इमारत

जौनपुर धारा, जौनपुर। सरकार ने करीब एक दशक पहले करोड़ों रुपये की लागत से आदमपुर में एक अत्याधुनिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का निर्माण कराया था। बड़े सपनों और आशाओं के साथ तैयार यह भवन आज बदहाली का प्रतीक बनकर रह गया है। डॉक्टरों की नियुक्ति न होने के चलते यह स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ एक वीरान इमारत बनकर रह गया है, जहां न तो उपचार की सुविधाएं हैं और न ही प्रसव एवं एक्स-रे जैसी मूलभूत सेवाएं। सूत्रों से पता चला है कि स्वास्थ्य केंद्र में सफाई व्यवस्था की स्थिति भी अत्यंत दयनीय है। एक वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि वार्ड बॉय से पानी डालकर सफाई कराई जा रही है। चारदीवारी के भीतर गंदगी का अंबार फैला हुआ है, दरवाजे और खिड़कियों के शीशे टूट चुके हैं, और जगह-जगह कूड़े का अंबार लगा है। भवन का बीम तक जर्जर होकर गिरने की स्थिति में है। स्थिति इतनी बदतर है कि कुत्ते भी भीतर आराम से घूमते दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि इस स्वास्थ्य केंद्र से उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी और दूरस्थ अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। लेकिन आज भी उन्हें मामूली इलाज के लिए 30-35किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। फिलहाल यहां सिर्फ एक डेण्टल हाइजीनिस्ट और एक फार्मासिस्ट तैनात हैं, जो हर दिन सात से दस मरीजों को सामान्य दवाएं उपलब्ध कराते हैं। न प्रसव, न नसबंदी, न ही मोतियाबिंद के ऑपरेशन जैसी सेवाएं यहां उपलब्ध हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस स्वास्थ्य केंद्र को सुचारू रूप से संचालित किया जाए। उनकी प्रमुख मांगों में डॉक्टरों की स्थायी नियुक्ति, प्रसव और एक्स-रे जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता, तथा नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करना शामिल है। प्रशासन की उदासीनता ने जिस उम्मीद को जन्म दिया था, वह आज आंसू बहा रहा है।अब समय है कि सरकार इस ओर तत्काल ध्यान दे और आदमपुर वासियों को उनके अधिकार के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराए। मामले में वर्जन लेने के लिये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करंजाकला चिकित्सा डॉक्टर संतोष जायसवाल से सम्पर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन नहीं हो सकी। मजे की बात तो यह है कि जिले के उच्चाधिकारियों के सीयूजी पर संपर्क करने की कोशिश की जाती है लेकिन फोन रिसीव नहीं होता है।