नागालैंड विधानसभा चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग ने नामांकन पत्रों की जांच के बाद 222 आवेदनों में 22 को अवैध पाया है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि राज्य में 27 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए 225 प्रत्याशियों ने नामांकन भरा था, जिनमें से तीन बाद में चुनाव मैदान से हट गए थे. अधिकारी ने बताया कि जिन 200 उम्मीदवारों के नामांकन पत्र वैध पाए गए है, उनमें चार महिलाएं शामिल हैं. सत्तारूढ़ नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, नगा पीपुल्स फ्रंट, कांग्रेस, लोक जनशक्ति पार्टी, नेशनल पीपुल्स पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, राइजिंग पीपुल्स पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी समेत 13 दलों ने अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं.
इतने निर्दलीय उम्मीदवार हैं चुनाव मैदान में
20 से ज्यादा निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं. नामांकन पत्र वापस लेने की अंतिम तारीख शुक्रवार (10 फरवरी) है. मतों की गिनती दो मार्च को होगी. बता दें कि नागालैंड के अलावा पूर्वोत्तर के दो और राज्यों मेघालय और त्रिपुरा के नतीजे भी उसी दिन यानी दो मार्च को जारी किए जाएंगे.
एनडीपीपी-बीजेपी के लिए सत्ता में वापसी करने की चुनौती
नागालैंड में विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 12 मार्च तक है. वर्तमान में राज्य में बीजेपी और एनडीपीपी की गठबंधन सरकार है. इस गठबंधन में एनपीएफ भी पिछले साल शामिल हुई थी. नेफ्यू रियो राज्य के मुख्यमंत्री हैं. इस बार के चुनाव में बीजेपी और एनडीपीपी ने पूर्व में की गई अपनी घोषणा के मुताबिक सीटों का समझौता किया है. राज्य की कुल 60 विधानसभा सीटों में से 20 पर बीजेपी तो 40 पर एनडीपीपी ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं. कांग्रेस और जेडीयू भी चुनावी मैदान में हैं.



