- शहीद श्रमिकों को याद करके आंख हुई नम
जौनपुर धारा,सोनभद्र। 2 जून 1991 का वह काला दिन आज भी डाला के लोगों के दिलों में जख्म बनकर टीसता है। इसी दिन निहत्थे श्रमिकों पर पुलिस की गोलियों की बौछार हुई थी, जिसने डाला सीमेंट फैक्ट्री के नव घरों को उजाड़ दिया था।
सोमवार को डाला नगर में उन्हीं शहीद श्रमिकों की पुण्यतिथि पर डाला शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। सोमवार की सुबह दुर्गा सप्तशती पाठ और शांति पाठ के साथ श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आगाज हुआ, और दिनभर शरबत वितरण चलता रहा। शहीद श्रमिकों की याद में 3.20बजे वाराणसी-शक्तिनगर मुख्यमार्ग पर दो मिनट का सांकेतिक चक्का जाम करके शहीद श्रमिकों को श्रद्धांजलि अर्पित किया गया।

इस दौरान शहीद श्रमिकों के परिजन शहीद स्मारक पर पहुंचे और पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान डाला तेरा यह बलिदान याद करेगा हिंदुस्तान, इंकलाब जिंदाबाद, मजदूर एकता जिंदाबाद व आवाज दो हम एक हैं। जैसे नारे गूंजायमान हो उठे। शहीद श्रमिकों के परिजनों के श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद डाला सीमेंट फैक्ट्री के भूतपूर्व कर्मचारियों, आम नागरिक, मजदूर, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी भी श्रद्धा सुमन अर्पित करने पहुंचे। कार्यक्रम में डाला नगर पंचायत अध्यक्षा फुलवंती गोड़ ने भी पहुंचकर शहीदों को नमन किया। कांग्रेस, सपा, भाजपा, बसपा समेत तमाम दलों के स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी एकजुट होकर शहीदों के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करके श्रद्धांजलि अर्पित किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र निरव ने उस भयावह दिन की दास्तान को बड़ी ही मार्मिकता से सबके सामने रखा। हर किसी की आंखें उस वक्त भर आईं जब उन्होंने बताया कि कैसे राज्य सीमेंट निगम की फैक्ट्री को घाटे में दिखाकर निजी हाथों में सौंपने की साजिश का विरोध कर रहे निहत्थे श्रमिकों पर गोलियां बरसाईं गई थीं। उस दिन नौ निर्दोष मजदूरों ने अपनी जान देकर डाला की सीमेंट फैक्ट्री को बचाने की कोशिश की थी। लेकिन फैक्ट्री के ताले लगने के साथ न जाने कितनों के सपने भी हमेशा के लिए कैद हो गए। कितनों की पढ़ाई छूट गई, कितनों ने कलम छोड़ फावड़ा पकड़ा और कितनों के घरों के चूल्हे हमेशा के लिए बुझ गए। फैक्ट्री के ताले ने डाला के युवाओं के भविष्य पर भी ताला लगा दिया जिसका दंश आज भी डाला सीमेंट फैक्ट्री के भूतपूर्व कर्मचारियों के बच्चे झेल रहे हैं। डाला तेरा यह बलिदान, याद करेगा हिंदुस्तान यह अमर नारा आज भी डाला के हर बच्चे की जुबान पर है। बताते चलें कि आज भी सीमेंट फैक्ट्री के मजदूरों को उनकी मेहनत की पूरी कीमत नहीं मिली है। कई मजदूर तो अब इस दुनिया में नहीं रहे,लेकिन उनकी बूढ़ी आंखें आज भी माननीय न्यायालय से न्याय की आस लगाए बैठी हैं। श्रद्धांजलि सभा के कार्यक्रम में शहीद श्रमिकों के परिजन ओम प्रकाश तिवारी, सपना, विजय, सत्यप्रकाश स्थानीय लोगों में ओम प्रकाश तिवारी, संतोष सिंह बबलू, अंशु पटेल, मुकेश जैन, अवनीश पांडेय, अहमद, संदीप पटेल, विनोद यादव, श्रमिक नेता उत्तम मिश्रा, नागेश मणी पाठक, मंगला प्रसाद जायसवाल, पारसनाथ यादव, अविनाश, गायत्री तिवारी, सोनू सिंह, धीरेन्द्र सिंह पटेल, राजेश पटेल लोजपा प्रदेश महासचिव प्रतिभा सिंह, इंदू शर्मा, अविनाश शुक्ला, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मवीर तिवारी, बृजेश तिवारी, नागेंद्र पासवान, अवधेश चौहान, जुम्मन, विकास जैन, अहमद हुसैन, रामनिवास, गुड्डू पटेल, संतोष कुमार, रजनीश, मनोज पांडेय, सर्वेश पटेल समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।



