- मेंटेनेंस के नाम पर दिनभर अंधेरा, जनता बेहाल
जौनपुर। शहरी इलाकों में अघोषित बिजली कटौती ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। सुबह से शुरू हुई बिजली की आंख-मिचौली कुछ देर बाद लम्बी कटौती में परिवर्तित हो गई और देर शाम तक कटी रही। विभाग की ओर से हर बार ‘मेंटेनेंस कार्यÓ का हवाला दिया जाता है, लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि यह मेंटेनेंस कम और मनमानी ज्यादा लगती है। बिना पूर्व सूचना के सप्लाई बंद कर देना आम बात हो गई है, जिससे लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
कई बार फोन करने पर भी सही जानकारी नहीं मिलती। लोगों का कहना है कि यदि मेंटेनेंस कार्य आवश्यक है तो इसकी पूर्व सूचना दी जानी चाहिए, ताकि आम जनता अपने दैनिक कार्यों की योजना बना सके। बाजारों में बिजली कटौती का सीधा असर व्यापार पर पड़ा। प्रिंटिंग, फोटोस्टेट, साइबर कैफे और इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों पर कामकाज ठप रहा। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अगर मेंटेनेंस जरूरी है तो इसकी स्पष्ट समय-सारिणी जारी की जाए। अघोषित कटौती से जनता को परेशान करना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। शहरवासियों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि अघोषित कटौती पर तत्काल रोक लगाई जाए और नियमित व पारदर्शी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही, मेंटेनेंस कार्यों की स्पष्ट समय-सारिणी जारी कर उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानियों से राहत दिलाई जाए। यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो नागरिकों ने सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है।
अधिकारियों की जानकारी भी अधूरी
मामले में हैरानी की बात यह है कि बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों को भी कई बार जमीनी हालात की कोई खास जानकारी नहीं रहती। पूछे जाने पर वे यही जवाब देते हैं कि एनटी बोल्ट जाम होने जैसी तकनीकी स्थिति उत्पन्न हो जाने पर बिजली आपूर्ति बहाल करने में देर हो जाती है। हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि यह जवाब अब एक तयशुदा बहाना बन चुका है, क्योंकि लगभग हर दिन इसी तर्क के सहारे घंटों की अघोषित कटौती को जायज ठहराने की कोशिश की जाती है, जबकि असल परेशानी का स्थायी समाधान आज तक नहीं हो पाया है।



