- जौनपुर-प्रयागराज सड़क मार्ग बड़े-बड़े गड्ढों में हो गया है तब्दील
जौनपुर धारा, मुंगराबादशाहपुर। सर पर कफन बांध मौत के साए में मुंगराबादशाहपुर-प्रयागराज से गड्ढों युक्त सड़क मार्ग पर जान जोखिम में डालकर आवागमन को मजबूर हैं। क्षेत्र के लोग और स्कूल-कालेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थी शिकायतें करके हताश हो गए है। क्षेत्र के लोग, नेता, समाजसेवी विधायक व सांसद इस गंभीर हालत में चुप्पी साधे हुए हैं। इस समस्या की गूंज जिले के जिम्मेदारों के कानों तक नहीं पहुँच रहीं हैं। जो किसी बड़ी दुर्घटना की राह देख रहे हैं ताकि सब नींद से जग सकें। बताते चलें कि जौनपुर-मुंगराबादशाहपुर-प्रयागराज सड़क मार्ग स्थानीय थाने से लेकर लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर तक बेहद खराब हो गया है और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील होता जा रहा है। जिससे राहगीरों, क्षेत्रवासियों, वाहन चालकों, स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अपनी जान जोखिम में डालकर मौत के साए में चलने को मजबूर और विवश हो गए हैं।उनकी सुनने वाला कोई नहीं है, शिकायतें करते-करते लोग निराश और हताश होकर दुर्घटनाओं का दावत स्वीकार करतें सड़क पर चलने को मजबूर हो चुके हैं और शासन व जिले के जिम्मेदार इस गंभीर समस्या पर अनजान बन कुम्भकर्ण की नींद सो रहे हैं। आम दिनों उक्त सड़क पर इतना धूल उड़ता रहता है कि आदमी सड़क से गुजरते हुए 50 ग्राम धूल फांक जाये। बता दें कि कलेक्ट्रेट, विकास भवन, जिला अस्पताल आदि कई महत्वपूर्ण विभागों में आने-जाने का मुख्य सड़क मार्ग है। जैसे यह सरकारी अस्पताल, ब्लॉक, किसान मंडी समिति, विकासखण्ड कार्यालय, थाना, नगर पालिका, बस स्टैण्ड व स्कूल कालेजों व मुंगराबादशाहपुर के ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग भी है। आए दिन बच्चे बुजुर्ग सड़क पर बने गड्ढों में गिरकर घायल होते रहते हैं लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधियों को जनता की फिक्र नहीं है और तो और यहाँ पर सतहरिया इंडस्ट्रीज एरिया भी है। जिनमें कई कारखाने और फैक्ट्रियां स्थापित हैं। फिर भी जनता के साथ सौतेला दुर्व्यवहार किया जाता है। जब भी कोई त्योहार आता है तो आलाधिकारी सड़क मार्ग की पैचिंग कराकर अपनी पीठ थपथपा लेते हैं। लेकिन एक पखवाड़ा भी नहीं बीत पाता है कि सड़क पर गड्ढे होने लगते हैं। जबकि यह सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग है। लेकिन मुंगराबादशाहपुर थाने से कमालपुर तक सड़क हमेशा गड्ढों में तब्दील रहता है। फिलहाल राहगीर, क्षेत्रवासी और विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर माैत के साए से होकर सड़क मार्ग चलने को विवश हैं। जिससे उनके परिजनों को भी हमेशा किसी अनहोनी का डर लगा रहता है। जब तक कि बच्चा घर न आ जाए। वहीं जिम्मेदार सब कुछ देखते और जानते हुए भी अनजान लोगों की भांति कुम्भकर्ण की नींद सोते हैं और ये तभी जागेंगे जब कोई बड़ी दुर्घटना होगी।



